इनोवेशन,सॉफ्टवेयर ही बता देगा कि मैसेज है फेक
मध्य प्रदेश पुलिस व राज्य साइबर मुख्यालय की हैकाथॉन में सामने आए एक से बढ़कर एक तकनीकी समाधान

इनोवेशन,सॉफ्टवेयर ही बता देगा कि मैसेज है फेक
मध्य प्रदेश पुलिस व राज्य साइबर मुख्यालय की हैकाथॉन में सामने आए एक से बढ़कर एक तकनीकी समाधान
साइबर अपराधों से निपटने आगे निकल पड़े हैं, उससे निपटने के लिए बेहतर समाधान खोजने युवाओं को मौका दिया गया। अगर लोग सोशल मीडिया पर फेक मैसेज फैला रहे हैं, तो उसे पकड़ने और रोकने के लिए बेहतर सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है। मध्य प्रदेश पुलिस व राज्य साइबर मुख्यालय ने हाल ही में साइबर हैकाथॉन का आयोजन किया। इसमें पूरे देश भर से युवाओं ने सॉफ्टवेयर दिए। इनमें एक सॉफ्टवेयर ने अलर्ट देकर बता दिया कि यूजर के मिला मैसेज फेक है।
पूरे भारत वर्ष से 10 टीमों को सिलेक्ट किया गया।न
। इनमें प्रतिभागियों की टीम न केवल फेक मैसेज बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग और साइबर अपराध रोकने वाले इनोवेशन भी लेकर आईं। हैकाथॉन में शामिल पुलिस महानिरीक्षक जबलपुर जोन उमेश झा, राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय के एडीजी उपाध्याय, एसपी हेडक्वॉर्टर संजय जायसवाल, एसपी साइबर संजीव उइके, डीएसपी नवल गुप्ता, हर्षित श्रीवास्तव, कोऑर्डिनेटर आकाश तिवारी मौजूद रहे।
विजेताओं की टीम में रहे शामिल
हरिन टीम में रोशन, साक्षी गुप्ता, विवेक कुमार, राघव गुप्ता व गरिमा गुप्ता शामिल थे। दूसरे नंबर पर रही टीम में कुशाग्र, सूर्य प्रकाश, अक्षिता व सृष्टि। तीसरे नंबर पर कैकेट्स नेक्स्ट्स टीम रही जिसमें साक्षी, अभिषेक, सृष्टि व अभय शामिल रहे।
विनर: ट्रिनेत्र रोकेगा मनी लॉन्ड्रिंग
ज्ञान गंगा इंस्टिट्यूट जबलपुर की टीम से साक्षी गुप्ता ने बताया कि उनकी टीम ने एप्लिकेशन बनाई है जिसे ट्रिनेत्र नाम दिया है। इसके जरिए टाइम स्पेसिफिक में किसी भी संदिग्ध अकाउंट को चिन्हित कर सकते हैं। इस एप्लिकेशन के माध्यम से बैंक व अन्य वित्तीय संस्थान अपने ग्राहकों की टेन-द-बेस पर निगरानी रख सकते हैं।
फर्स्ट रनरअप – यूजर को अलर्ट करेगा इनोवेटिव सॉफ्टवेयर
अमृता स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी चेन्नई की टीम ने सॉफ्टवेयर विकसित किया। इसमें अगर कोई यूजर व्हाट्सएप या अन्य किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से कोई मैसेज फॉरवर्ड करता है तो यह सॉफ्टवेयर तुरंत यूजर को अलर्ट करेगा और बताएगा कि यह मैसेज फेक है।
सेकंड रनरअप – अननोन लिंक या एप स्कैन
नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी देहली की टीम ने इनोवेटिव सॉफ्टवेयर बनाया। इसमें किसी भी अननोन लिंक या एप को स्कैन कर सकते हैं। अगर वह फेक पाया गया तो तुरंत उसे डिलीट करने का मैसेज स्क्रीन पर आएगा। यह सॉफ्टवेयर यूजर को किसी भी तरह की धोखाधड़ी से बचा सकता है।







