मिल गई सौगात : कटनी के मेडिकल कॉलेज के लिए सरकार और स्वामी विवेकानंद फाउंडेशन के बीच हुए अनुबंध पर हस्ताक्षर, केंद्रीय स्वास्थ मंत्री जेपी नड्डा और सीएम मोहन यादव रहे मौजूद

कटनी, यशभारत। केन्द्रीय परिवार कल्याण एवं स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की मौजूदगी में आज जबलपुर के घंटाघर स्थित नेताजी सुभाष चन्द्र बोस सांस्कृतिक सूचना केन्द्र में आयोजित भव्य समारोह में कटनी जिले में पी पी पी माडल पर नवीन चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना हेतु अनुबंध हस्ताक्षरित हुआ। नवीन मेडिकल कॉलेज के लिए राज्य सरकार और स्वामी विवेकानन्द फाउंडेशन के बीच अनुबंध हुआ। इस मौके पर डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला और क्षेत्र के सांसद वीडी शर्मा, कटनी के विधायक संदीप जायसवाल भी मौजूद रहे। कटनी के लिए नवीन मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए अनुबंध हस्ताक्षरित होने के कार्यक्रम का सीधा प्रसारण यहां कटनी जिला चिकित्सालय में जनप्रतिनिधियों और कटनी वासियों ने देखा और सुना।
विवेकानंद फाउंडेशन के साथ अनुबंध हो जाने के बाद अब कटनी में मेडिकल कॉलेज खुलने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। लंबे समय से कटनी के नेताओं ने इसके लिए भोपाल से लेकर दिल्ली तक प्रयास किए, जिसका नतीजा अब इस सौगात के रूप में मिल गया है। विदित हो कि मेडिकल कॉलेज के लिए कछगवां में जमीन का चयन भी हो चुका है और पूर्व में प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य मंत्री भी इसका निरीक्षण भी कर चुके हैं। बताया जाता है कि प्रदेश के जिन जिलों में मेडिकल कॉलेज नहीं हैं, उसमे कटनी जिला भी शामिल है। 2023 के विधानसभा चुनाव के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सरकारी मेडिकल कॉलेज की घोषणा थी। बाद में यह पीपीपी मोड में बदल गया। अब केन्द्र सरकार ने जहां मेडिकल कॉलेज नहीं हैं, वहां पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज शुरू किए जाने की योजना तैयार की है। इसी कड़ी में आज कटनी को भी मेडिकल कॉलेज की सौगात मिली। जानकारी के मुताबिक राज्य सरकार निजी निवेशकों को अपना जिला अस्पताल उपलब्ध कराएगी। संचालन प्राइवेट इनवेस्टर्स करेंगे। मेडिकल कॉलेज में जिला अस्पताल सरकारी होगा, बाकी सुविधाएं पीपीपी मोड पर दी जाएंगी। फीस मध्यप्रदेश फीस विनियामक कमेटी तय करेगी। पीपीपी मॉडल पर आधारित अस्पताल में आयुष्मान भार कार्डधारक मरीजों के को साथ आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों भी निःशुल्क उपचार मिल सकेगा, वहीं गैर आयुष्मान मरीजों को निजी अस्पतालों के जैसे शुल्क पर उपचार सुविधा मिलेगी। अस्पताल में 75 प्रतिशत बेड आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए होंगे, 25 प्रतिशत बेड का उपयोग निजी एजेंसी करेगी।








