जिम्मेदार नींद में : मुक्तिधाम में खरपतवार की चादर , जर्जर स्थल बना परेशानियों का सबब

डिंडोरी lजिले के मुख्य मुक्तिधाम के हालात बदहाल हैंlजहां बरसात के चलते खरपतवार उग आए हैं तो वहीं आसपास कचरे का भी अंबार लगा हुआ है। हालात यह है कि अंतिम संस्कार में जाने वाले लोगों को भारी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है l चारों ओर पसरी गंदगी, खरपतवार का जंगल, और टूटी-बिखरी चितास्थल की हालत देखकर लगता है कि यह अंतिम विदाई का स्थान नहीं, बल्कि प्रशासन की लापरवाही का स्मारक है। जहां कभी आत्मा की शांति के लिए दीप जलते थे, वहां कचरे की ढेर साजे है। जहां श्रद्धा से मौन रहना चाहिए, वहां अब लोग खरपतवार हटाने के लिए डंडा ढूंढते हैं। हालात यह है कि अब यह जगह शराबियों के अड्डे में तब्दील हो गई है जहां सांझ ढलते ही जाम छलकते हैं ।
मुक्ति मांग रहे मुक्तिधाम के वर्तमान हालात देख ऐसा प्रतीत होता है जैसे नगर परिषद और प्रशासन की चुप्पी मानो यही कह रही हो – की हालात ऐसे ही रहेंगे lजनप्रतिनिधि भी इस कदर स्व स्वार्थ मे लिप्त हो चुके है कि उन्हें मुक्तिधाम कि बदहाली नजर ही नहीं आती।
इनका कहना है…
मै यहॉ अनेको दफा अंतिम संस्कार मे शामिल होने आता हूं, लेकिन हर बार खरपतवार और गंदगी के ढेर देख मन व्यथित हो उठता है. हाँ इतना जरूर कहूंगा कि मुक्तिधाम मे आत्मा को शान्ति मिले ना मिले, लेकिन खरपतवार और गंदगी कि गारंटी जरूर मिलेगी।
जीतेन्द्र विश्वकर्मा , जिला अध्यक्ष,अंतराष्ट्रीय हिंदू परिषद बजरंग दल
मुक्तिधाम के दिन ब दिन बिगड़ते हालात देख अब शहरवासियों का धैर्य जवाब देने लगा है, अगर जल्द ही इस पवित्र स्थल कि साफ – सफाई और मरम्मत नहीं हुई तो आने वाले दिनों मे यही मुक्तिधाम जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के खोखले वादों कि चिता जलाने का गवाह बनेगा। मुक्तिधाम मे उगी खरपतवार और चहुओर फैले गन्दगी के ढेर इस बात कि गवाही देंगे कि सत्ता मे बैठे लोग सिर्फ चुनावी मंचों पर जनता के सुख – दुख के साथी बनते हैं, जमीनी हकीकत मे नहीं।
रविराज बिलैया ( समाजसेवी )
वास्तव मे मुक्तिधाम कि बदहाली देख यही कहा जा सकता है जहाँ जीवितों कि सुध नहीं, वहां मृतकों के सम्मान कि उम्मीद करना बेमानी है, बहरहाल नगरीय प्रशासन् को इस मामले मे गंभीरता से चिंतन करने कि आवश्यकता है।
सम्यक जैन ( युवा अधिवक्ता )







