दूध के बढ़े दामों पर मुँह में जमा दही प्रशासन और राजनीतिक दलों का मौन व्रत आश्चर्य जनक

जबलपुर यश भारत। दूध माफिया के द्वारा ऐनृ बरसात और त्योहार के मौके पर जिस तरह से दूध के दामों में बढ़ोतरी की गई है उससे आम आदमी का बजट गड़बड़ा गया है। आम आदमी कातर दृष्टि से प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर देख रहा है कि शायद यह लोग कुछ हस्तक्षेप करके उन्हें दूध की बढे हुए दामों से राहत दिलवाएंगे। लेकिन जिस तरह से जनता से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर अब तक ना तो प्रशासन की कोई पहल दिखाई दी है और ना ही राजनीतिक दलों से जुड़े लोग इस पर कुछ बोलने से तैयार है जैसे सभी के मुंह पर दही सा जम गया हो। कुछ जन संगठन जरूर ऐसे है जो अपने स्तर पर इसकी खिलाफत करने सड़क पर उतर आये है और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर दूध के दामों को नियंत्रित करने की मांग भी उठा रहे हैं। लेकिन इनके विरोध को देरी सिंडिकेट हल्के में ले रहा है और कोई उनकी सुनने वाला भी नजर नहीं आ रहा जो आश्चर्य का विषय है।
दूध उत्पाद, दूध डेरी, दूध विक्रय केन्द्र को जांच मुक्त रखा जाना समझ से परे
गौरतलब है कि अभी हाल में कलेक्टर दीपक सक्सेना के द्वारा के द्वारा व्यावसायिक इकाइयों प्रतिष्ठानों की जांच के लिए सप्ताह के सातों दिन के लिए अलग-अलग जांच दल गठित किए हैं लेकिन जो आदेश जारी हुआ है उसमें दूध की गुणवत्ता, नाप,भाव के लिए कोई अधिकारिक रूप से अधिकारी नियुक्त नही किया गया है। जबकि दूध का मुद्दा तो सीधे जनता से जुड़ा हुआ है।
जो जांच दल गठित किए गए हैं वे जिले में संचालित होटल, रेस्टोरेंट, निजी अस्पताल एवं नर्सिंग होम, पेट्रोल पम्प गैस वितरण ऐजेन्सी, मेडीकल स्टोर्स जैसी सभी व्यावसायिक इकाईयों, राशन दुकानों, शैक्षणिक संस्थानों, कृषि आदान विक्रय प्रतिष्ठानों तथा औद्योगिक इकाईयों का निरीक्षण करेंगे और नियामक नियमों का पालन सुनिश्चित करायेंगे।
सप्ताह के सातों दिन के लिए अलग-अलग गठित इन जांच दलों में शुक्रवार के लिए दो दलों का गठन किया गया है। इन जांच दलों में स्वास्थ्य, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, खाद्य, नगर निगम, प्रदूषण नियंत्रण मंडल, उद्योग, कोषालय, शिक्षा, विद्युत, आबकारी, खनिज, नापतौल एवं श्रम विभाग के अधिकारियों को शामिल किया गया है। जांच दलों का कार्यक्षेत्र सम्पूर्ण जिला रहेगा। प्रत्येक जांच दल को नियत दिवस पर कार्यवाही कर जांच प्रतिवेदन चौबीस घंटे के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन इसमें दूध माफिया को शामिल न किये जाने से वे मनमानी कर बेखौफ होकर अपना काम कर रहे है।
दाम बढ़ने से दैनिक उपयोग और त्योहारों को लेकर लोगों में चिंता
ऐन त्योहारों के मौके पर जिस तरह से दूध के दाम बढाये गए हैं उसने लोगों को चिंता में डाल दिया है जिसका सीधा असर न केवल लोगों के मासिक बजट पर तो पड़ेगा ही लेकिन त्यौहार में ही उन्हें अतिरिक्त आर्थिक बौझ झेलना पड़ेगा। त्योहारों के मौके पर मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है और जब दूध के दाम बढ़ गए तो स्वाभाविक मिष्ठान कारोबार से जुड़े लोग भी अपने उत्पादों का रेट बढ़ा देंगे जिसका सीधा असर लोगों की जेब पर पड़ेगा। यदि जनप्रतिनिधियों और प्रशासन का ऐसा ही रवैया रहा तो आने वाले दिनों में दूध सिंडिकेट की योजना तो दाम 75 रुपए तक बढ़ाने की योजना है।और यदि ऐसा करने में वह सफल हो गए तो इसका आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।








