मध्य प्रदेश विधानसभा में अनुपूरक बजट पारित
भोपाल यशभारत। मध्य प्रदेश विधानसभा में 2356.80 करोड़ का प्रथम अनुपूरक बजट पारित किया गया है। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने इसे सदन में प्रस्तुत किया, जिसमें स्वास्थ्य, आपदा राहत, पुलिस, तकनीकी शिक्षा समेत कई विभागों को राशि का आवंटन किया गया है। इसमें 1003.99 करोड़ राजस्व मद तथा 1352.81 करोड़ पूंजीगत मद में प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने प्रोविडेंट इन्वेस्टमेंट कंपनी लिमिटेड का 2018-19, 2019-20 और 2020-21 के वर्षिक प्रतिवेदन पटल पर रखें। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय छिंदवाड़ा का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2023-24 और मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखा संपरिक्षक प्रतिवेदन 2024-25 पटल पर रखे। वहीं मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग की अधिसूचना और मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत कम वितरण कंपनी लिमिटेड का 22वां वर्षिक प्रतिवेदन वित्त वर्ष 2023-24 को पटल पर रखा। जानकारी के अनुसार अलग-अलग विभागों के लिए इस अनुपूरक अनुमान में प्रावधान किए गए हैं। इसमें गृह विभाग के अंतर्गत केंद्रीकृत पुलिस कॉल सेंटर और नियंत्रण तंत्र के लिए 62.20 करोड़, अपराध एवं अपराधियों पर निगरानी के लिए 57 करोड़ तथा पुलिस बल के व्यय की प्रतिपूर्ति के लिए 5 करोड़ का प्रावधान किया गया है। राजस्व विभाग को राष्ट्रीय आपदा शमन निधि से प्राप्त 88.72 करोड़ की राशि तथा आपदा लेखांकन के लिए 9.85 करोड़ (राज्यों का 10 प्रतिशत अंशदान) का प्रावधान दिया गया है। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को 15वें वित्त आयोग की अनुशंसा पर स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए सर्वाधिक 1602.30 करोड़ का प्रावधान प्राप्त हुआ है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग को यूनिटी मॉल निर्माण के लिए 142 करोड़, विकास प्राधिकरणों को अनुदान के रूप में 20 करोड़ तथा सिटीज-2.0 के स्टेट एक्शन के लिए 9.51 करोड़ का प्रावधान किया गया है। लोक निर्माण विभाग को पुलों के निर्माण के लिए 50 करोड़, वृहद निर्माण के लिए 40 करोड़ तथा एनडीबी से वित्त पोषित सड़क निर्माण के लिए 10 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है। तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग के तहत निजी तकनीकी कॉलेजों व संस्थानों की सहायता के लिए 113.15 करोड़ प्रस्तावित किए गए हैं। अनुसूचित जाति कल्याण विभाग को प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना के अंतर्गत 30 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।

समृद्ध किसान, समृद्ध प्रदेश का लक्ष्य , वंदे मातरम गायन के साथ शुरू हुआ कार्यक्रम कृषि कल्याण वर्ष 2026 कार्यशाला में विकास का रोडमैप तय सीएम डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में कृषि, पशुपालन और तकनीक आधारित योजनाओं पर जोर, 55 जिलों के अधिकारी भोपाल में जुटे *भोपाल यश भारत।* मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश को कृषि क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में अभ्युदय मध्यप्रदेश के तहत कृषि कल्याण वर्ष 2026 की राज्यस्तरीय कार्यशाला का आयोजन राजधानी भोपाल स्थित रविंद्र भवन में किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में प्रदेश के सभी संभागों और 55 जिलों से कृषि विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य समृद्ध किसान, समृद्ध प्रदेश के लक्ष्य को साकार करना रहा, जिसमें कृषि, पशुपालन, सहकारिता, मत्स्य पालन और तकनीकी नवाचारों के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम के दौरान जैविक खेती, मिट्टी परीक्षण, ई-विकास प्रणाली और आधुनिक कृषि तकनीकों पर विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। *सीधे किसानों से जुड़ने का प्रयास करें अधिकारी* अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे सीधे किसानों से जुड़कर योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचाएं और संवाद को मजबूत करें। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में रबी और खरीफ दोनों सीजन के लिए बेहतर तैयारी की जा रही है। उर्वरकों की उपलब्धता पर स्पष्ट किया गया कि डी ए पी , यूरिया और एन पी के सहित सभी उर्वरकों की प्रदेश में कोई कमी नहीं है। साथ ही दुष्प्रचार फैलाने वालों को चेतावनी देते हुए कहा गया कि गलत जानकारी से किसानों में भ्रम न फैलाएं। ई-विकास मॉडल बना मिसाल कार्यशाला में ई-विकास पहल को किसानों तक तकनीक आधारित सेवाएं पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बताया गया। जबलपुर, शाजापुर और विदिशा जिलों में इसका पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा है जिसे अब पूरे प्रदेश में लागू करने की तैयारी है। *किसानों को हर स्तर पर समर्थन* सरकार द्वारा किसानों को लोन, कृषि यंत्र, उन्नत बीज, उर्वरक, बिजली, सौर ऊर्जा, प्राकृतिक खेती और आपदा के समय मुआवजा जैसी सुविधाएं लगातार उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रदेश में लगभग 55 लाख हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित है जिससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई है। इसके अलावा मार्केटिंग, सहकारिता, मछली पालन और पशुपालन को भी आय के अतिरिक्त स्रोत के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे सोशल मीडिया के माध्यम से भी किसानों को जागरूक करें और नगदी फसलों को बढ़ावा देने की दिशा में काम करें। *चार राज्यस्तरीय कार्यशालाएं होंगी आयोजित* सरकार ने निर्णय लिया है कि वर्ष 2026 के दौरान चार राज्यस्तरीय कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा ताकि योजनाओं की समीक्षा और सुधार लगातार जारी रहे। कुल मिलाकर यह कार्यशाला मध्यप्रदेश को कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रही है जिसमें तकनीक, पारदर्शिता और किसानों से सीधा संवाद प्रमुख आधार बने हैं। संबंधित सभी मंत्रीगण विधायक और अधिकारी गण सम्मिलित रहे
April 30, 2026