सामुदायिक भवन के निर्माण में लग गई 1550 बोरी सीमेंट ! ढाई ट्रक सीमेंट का बिल लगाकर पंचायत ने आहरित की राशि, पंचायतों में भ्रष्टाचार चरम पर, जिम्मेदारों पर सवाल
कटनी /रैपुरा, यशभारत। पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार का एक और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जिसमे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रैपुरा क्षेत्र की ग्राम पंचायत मनकौरा द्वारा 1231 वर्गफुट से कम के सामुदायिक भवन के निर्माण में 1550 बोरी सीमेंट का बिल लगाकर राशि आहरित कर ली गई। स्थानीय लोगों के अनुसार जिस भवन के निर्माण में सीमित मात्रा में सामग्री की आवश्यकता थी, वहां पर अधिक मात्रा में सीमेंट दिखाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है। बिल के अनुसार पंचायत द्वारा दो ट्रक से अधिक 1550 बोरी सीमेंट का उपयोग किया गया है, जो संदेह के घेरे में है। पंचायत दर्पण पोर्टल पर मौजूद जानकारी के अनुसार 1550 बोरी सीमेंट एक ही वेंडर से खरीदी गई, जिसमे 5 लाख 36 हजार 500 के बिल लगाए गए। 15 लाख के सामुदायिक भवन में 35 प्रतिशत पैसा सिर्फ सीमेंट में किया गया। जिसमें 8 अप्रैल को तीन बिलों में 1 लाख 46 हजार 900 रुपए तो वहीं 3 अप्रैल को एक ही दिन में नौ बिल लगाकर 5 लाख 24 हजार रूपये निकाले गए, जो कि मध्यप्रदेश भंडार क्रय तथा सेवा उपार्जन नियम 2015 का उल्लंघन हैं।
पंचायतें कर रही नियमों का उल्लघंन
2015 में पारित मप्र भंडार क्रय तथा सेवा उपार्जन नियम 2015 संशोधित 2022 के तहत ढाई लाख रुपए से अधिक के क्रय पर खुली निविदा जारी करना अनिवार्य है, जबकि पंचायतें बड़े-बड़े निर्माण के लिए न तो कोई निविदा निकालती हैं न ही नियमों का पालन करती हैं। इसी अधिनियम के अनुसार मात्र 25 हजार रुपए तक के मूल्य की अनारक्षित सामग्री का कार्य जैम पोर्टल या खुले बाजार से किया जा सकता है। इसी आदेश अथवा नियम के अनुसार पचास हजार से अधिक किंतु ढाई लाख रुपए तक के मूल्य की अनारक्षित सामग्री का क्रय विभागीय क्रय समिति की अनुशंसा पर किया जा सकता है। यह नियम मध्यप्रदेश के सभी विभागों, पंचायत एवं नगरीय निकायों पर लागू होता है। इस मामले ने पन्ना जिले की अन्य पंचायतों में हो रहे संभावित भ्रष्टाचार की परतें भी खोल दी हैं। जिले की कई पंचायतों में बिना भौतिक सत्यापन के बिलों का भुगतान किया जा रहा हैए जबकि जिम्मेदार अधिकारी कार्यवाही के नाम पर पूरी तरह निष्क्रिय हैं।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
गांव के जागरूक नागरिकों ने इस मुद्दे को लेकर सवाल उठाए हैं कि क्या विकास कार्यों की आड़ में सरकारी धन की खुली लूट की अनुमति है। बावजूद इसके पंचायत सचिव, रोजगार सहायक और जनपद स्तर के अधिकारी कोई ठोस जवाब नहीं दे पा रहे हैं।
इनका कहना है
इस संबंध में जब जिला पंचायत सीईओ से बात की गई तो उन्होंने कहा कि आप हमें बिल भेजिए, हम देखते हैं। जब हमने ढाई लाख से अधिक के लिए विभाग द्वारा निविदाएं न निकालने के संबंध में जानकारी मांगी तो उन्होंने कहा कि पंचायतें इनसे बाहर है। जब हमने नियमों का हवाला दिया तो उन्होंने अपनी बात खतम कर कॉल काट दिया। इस संबंध में हमने जनपद शाहनगर सीईओ भगवान सिंह से बात की तो उन्होंने कहा कि में अवकाश पर हंू।कटनी /रैपुरा, यशभारत। पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार का एक और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जिसमे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रैपुरा क्षेत्र की ग्राम पंचायत मनकौरा द्वारा 1231 वर्गफुट से कम के सामुदायिक भवन के निर्माण में 1550 बोरी सीमेंट का बिल लगाकर राशि आहरित कर ली गई। स्थानीय लोगों के अनुसार जिस भवन के निर्माण में सीमित मात्रा में सामग्री की आवश्यकता थी, वहां पर अधिक मात्रा में सीमेंट दिखाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है। बिल के अनुसार पंचायत द्वारा दो ट्रक से अधिक 1550 बोरी सीमेंट का उपयोग किया गया है, जो संदेह के घेरे में है। पंचायत दर्पण पोर्टल पर मौजूद जानकारी के अनुसार 1550 बोरी सीमेंट एक ही वेंडर से खरीदी गई, जिसमे 5 लाख 36 हजार 500 के बिल लगाए गए। 15 लाख के सामुदायिक भवन में 35 प्रतिशत पैसा सिर्फ सीमेंट में किया गया। जिसमें 8 अप्रैल को तीन बिलों में 1 लाख 46 हजार 900 रुपए तो वहीं 3 अप्रैल को एक ही दिन में नौ बिल लगाकर 5 लाख 24 हजार रूपये निकाले गए, जो कि मध्यप्रदेश भंडार क्रय तथा सेवा उपार्जन नियम 2015 का उल्लंघन हैं।
पंचायतें कर रही नियमों का उल्लघंन
2015 में पारित मप्र भंडार क्रय तथा सेवा उपार्जन नियम 2015 संशोधित 2022 के तहत ढाई लाख रुपए से अधिक के क्रय पर खुली निविदा जारी करना अनिवार्य है, जबकि पंचायतें बड़े-बड़े निर्माण के लिए न तो कोई निविदा निकालती हैं न ही नियमों का पालन करती हैं। इसी अधिनियम के अनुसार मात्र 25 हजार रुपए तक के मूल्य की अनारक्षित सामग्री का कार्य जैम पोर्टल या खुले बाजार से किया जा सकता है। इसी आदेश अथवा नियम के अनुसार पचास हजार से अधिक किंतु ढाई लाख रुपए तक के मूल्य की अनारक्षित सामग्री का क्रय विभागीय क्रय समिति की अनुशंसा पर किया जा सकता है। यह नियम मध्यप्रदेश के सभी विभागों, पंचायत एवं नगरीय निकायों पर लागू होता है। इस मामले ने पन्ना जिले की अन्य पंचायतों में हो रहे संभावित भ्रष्टाचार की परतें भी खोल दी हैं। जिले की कई पंचायतों में बिना भौतिक सत्यापन के बिलों का भुगतान किया जा रहा हैए जबकि जिम्मेदार अधिकारी कार्यवाही के नाम पर पूरी तरह निष्क्रिय हैं।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
गांव के जागरूक नागरिकों ने इस मुद्दे को लेकर सवाल उठाए हैं कि क्या विकास कार्यों की आड़ में सरकारी धन की खुली लूट की अनुमति है। बावजूद इसके पंचायत सचिव, रोजगार सहायक और जनपद स्तर के अधिकारी कोई ठोस जवाब नहीं दे पा रहे हैं।
इनका कहना है
इस संबंध में जब जिला पंचायत सीईओ से बात की गई तो उन्होंने कहा कि आप हमें बिल भेजिए, हम देखते हैं। जब हमने ढाई लाख से अधिक के लिए विभाग द्वारा निविदाएं न निकालने के संबंध में जानकारी मांगी तो उन्होंने कहा कि पंचायतें इनसे बाहर है। जब हमने नियमों का हवाला दिया तो उन्होंने अपनी बात खतम कर कॉल काट दिया। इस संबंध में हमने जनपद शाहनगर सीईओ भगवान सिंह से बात की तो उन्होंने कहा कि में अवकाश पर हंू।








