हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: MP विद्युत कंपनियों की 2000+ पदों की भर्ती अंतिम निर्णय तक कोर्ट के अधीन

गड़बड़ उत्तर कुंजी पर उठे सवाल, कोर्ट ने जारी किया नोटिस
जबलपुर, यश भारत। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य की विद्युत वितरण एवं ट्रांसमिशन कंपनियों में दो हजार से अधिक नियमित पदों की भर्ती को याचिका के अंतिम निर्णय तक के लिए स्थगित कर दिया है। यह फैसला उन दो प्रश्नों में उत्तर कुंजी की गड़बड़ी को लेकर दायर याचिका के प्रारंभिक सुनवाई के बाद आया है, जिसमें अपत्तियों के बावजूद परीक्षा एजेंसी ने उत्तरों में कोई सुधार नहीं किया था।
मामला मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी लिमिटेड, इंदौर द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षा का है, जिसके अंतर्गत दिनांक 21 मार्च 2025 को ऑनलाइन परीक्षा आयोजित की गई थी। यह परीक्षा प्रदेश की सभी विद्युत कंपनियों के कार्यालय सहायक (818 पद), लाइन परिचारक (1196 पद), कनिष्ठ अभियंता (237 पद) समेत कई तकनीकी व गैर-तकनीकी पदों हेतु आयोजित की गई थी।
❌ उत्तर कुंजी में गंभीर त्रुटियाँ
प्रश्न क्रमांक 16 में पूछा गया था:
“मध्य प्रदेश के किस लोक गायक को मालवी बोली में मीराबाई, गोरखनाथ व कबीर भजनों को बढ़ावा देने के लिए पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया?”
सही उत्तर है भेरू सिंह चौहान, लेकिन परीक्षा एजेंसी ने उत्तर माना कालूराम बामनिया।
इसी प्रकार, प्रश्न क्रमांक 25 में पूछा गया था:
“दिसंबर 2024 में किस केंद्रीय मंत्री ने सरकार के 100-दिवसीय एजेंडे के अंतर्गत छह नए कार्यक्रम शुरू किए?”
सही उत्तर है श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया, पर एजेंसी ने श्री किरेन रिजिजू को सही उत्तर माना।
📜 याचिका पर न्यायालय की कार्यवाही
इस गड़बड़ी को लेकर सागर निवासी अर्पित साहू, सीहोर निवासी अजय कीर, तथा हिमांशु साहू ने उत्तर कुंजी में सुधार की ऑनलाइन आपत्तियाँ साक्ष्यों सहित दर्ज की थीं, लेकिन एजेंसी द्वारा इन्हें नजरअंदाज कर दिया गया।इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने याचिका क्रमांक 20332/2025 हाईकोर्ट में दायर की। जिसकी सुनवाई न्यायमूर्ति विवेक जैन की खंडपीठ में हुई। कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया को याचिका के अंतिम निर्णय तक के लिए विचाराधीन घोषित कर दिया है।
⚖️ नोटिस जारी
कोर्ट ने इस मामले में
प्रमुख सचिव, ऊर्जा विभाग, वल्लभ भवन, भोपाल,
म.प्र. पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, इंदौर,
एम.पी. ऑनलाइन के सीईओ
को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर एवं अधिवक्ता हितेंद्र कुमार गोह्लानी ने पक्ष रखा।







