मध्य प्रदेशराज्य

शिक्षा विभाग में गजब फर्जीवाड़ा! न महिला ने नौकरी की, न युवक था बेटा… फिर भी मिल गई अनुकंपा नियुक्ति

रीवा lएमपी में गजब फर्जीवाड़ा मध्य प्रदेश के रीवा शिक्षा विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. एक व्यक्ति को उसकी मां की मौत के बाद फर्जी नियुक्ति दे दी गई. जबकि मां ने कभी शिक्षा विभाग में नौकरी ही नहीं की थी. उससे भी बड़ी बात, नियुक्ति पाने वाला उस मां का बेटा ही नहीं है. इसका सीधा सा अर्थ है, शुरू से अंत तक केवल फर्जीवाड़ा…!

रीवा शिक्षा विभाग ने एक ऐसे व्यक्ति को अनुकंपा नियुक्ति दे दी जिनके परिजन ने कभी भी शिक्षा विभाग में नौकरी ही नहीं की थीl दरअसल, एक व्यक्ति बृजेश कोल ने अपनी नकली मां स्वर्गीय बेला कली कोल को सहायक शिक्षक बताकर उनके फर्जी दस्तावेज तैयार कर लिए और लेकर पहुंच गया जिला शिक्षा अधिकारी के दफ्तर में, जहां पर कागजात की जांच करके उसको नियुक्ति दे दी गईl जबकि बृजेश कोल बेलाकली कोल का बेटा ही नहीं हैlजब मामला खुला तब उस व्यक्ति की नियुक्ति को निरस्त कर दिया गयाl

रीवा का शिक्षा विभाग हमेशा फर्जीवाड़ा को लेकर चर्चा में रहता है, शिक्षा विभाग में आए दिन कुछ ना कुछ ऐसी खबरें बन जाती है, जो चर्चा में आ जाती हैl
बृजेश कोल पिता शिवचरण कोल निवासी ग्राम पोस्ट परासिया तहसील त्योहार नाम के व्यक्ति ने अपनी नकली मां बनाई. नाम दिया बेला कली कोल….. उसके बाद उसने मां बेला कली कोल को सहायक शिक्षक के पद पर बताते हुए, 16 मई 2023 को उनकी मृत्यु साबित कर दीl इसके बाद अपने फर्जी दस्तावेज बनवा लिए और बेला कली कोल का नकली बेटा बन जिला शिक्षा अधिकारी के दफ्तर में पहुंच गयाl कागजात के आधार पर उसने शिक्षा विभाग में अनुकंपा नियुक्ति हासिल कर ली और चपरासी के पद पर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जौडौरी विकासखंड गंगेव में पदस्थ हो गयाl जबकि उसकी नकली मां बेला कली कोल ने कभी भी शिक्षा विभाग में नौकरी नहीं की थीl
मामला सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी सुदामा गुप्ता ने बृजेश की नियुक्ति निरस्त कर दी है और मामले की जांच हो रही है. इस मामले में रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल, जिला शिक्षा अधिकारी सुदामा गुप्ता का साफ तौर से कहना है कि बृजेश कोल ने कूट रचित दस्तावेज बिल्कुल असली की तरह बनवाए थे. देखने से कहीं भी नहीं लग रहा था, कोई कागजात नकली है. ऐसे में अब बड़ा सवाल यह है कि शिक्षा विभाग में जिस टेबल पर अनुकंपा नियुक्ति के पेपर देखे जाते हैं, वहां पर लंबे समय से ऐसे लोगों की नियुक्ति है, जो असली कागजात लाते हैं उनको भी नियुक्ति पाने में सालों लग जाता हैl लेकिन इस व्यक्ति को केवल 2 साल से भी कम समय में नियुक्ति दे दी गईl

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