8 पर एक्शन, क्या बाकियों को क्लीन चिट ? नर्सिंग होम्स और निजी अस्पतालों में नियम विरुद्ध चल रहे पैथॉलाजी सेंटरों पर कौन करेगा कार्यवाही
सवाल : जब पैथोलॉजिस्ट नहीं, तो कैसे जारी हो गए लायसेंस

कटनी, यशभारत। नियम विरुद्ध चल रहे 8 पैथॉलाजी सेंटरों पर एक्शन के बाद सवाल खड़ा हो गया है कि क्या शहर में बाकी सेंटर नियम के मुताबिक चल रहे हैं। सीएमएचओ के नोटिस के बाद अपने पैथोलॉजी सेंटरों के शटर बंद कर देने वाले संचालकों ने कल एकत्रित होकर कलेक्टर के नाम ज्ञापन एसडीएम को सौंपते हुए साफ कहा कि केवल उनके सेंटरों को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है, जबकि शहर में 50 से ज्यादा पैथोलॉजी सेंटर संचालित हैं। इसके अलावा निजी क्लीनिक, नर्सिंग होम्स और अस्पतालों में भी पैथोलॉजी संचालित हो रही हैं। इनकी ओर देखने की हिमाकत कोई क्यों नहीं कर पा रहा। सूत्र बताते है कि लगभग 100 सेंटरों में से उंगलियों पर गिनने लायक सेंटर ही सरकार के नियमों को पूरा कर रहे होंगे, बाकी ज्यादातर पैथॉलाजी सेंटरों में स्वास्थ्य विभाग की गाइड लाइन का पालन नहीं हो रहा। इन पर भी एक्शन होना चाहिए। सवाल ये भी है कि जब ये 8 सेंटर नियमों को पूरा नहीं कर रहे थे, तो सीएमएचओ ने इनको सेंटर संचालन की अनुमति क्यों दी।
सूत्रों के मुताबिक अधिकृत तौर पर जिले में 5 पैथोलॉजिस्ट हैं, जिनके खुद भी पैथॉलाजी सेंटर संचालित हैं, इनमें डॉ हरीश बजाज, डॉ कृति लहरिया, डॉ विनीत गुप्ता, डॉ शैलेष कनकने व एक अन्य शामिल हैं, इनमें से डॉ हरीश बजाज केवल अपने सेंटर का ही संचालन कर रहे हैं। स्वाभाविक तौर पर ये 5 एक्सपर्ट अधिकतम 10 पैथोलॉजी सेंटर को ही अनुबंधित या संचालित कर सकते हैं, ऐसी स्थिति में बाकी जो सेंटर चल रहे हैं, उनमें कहीं न कहीं नियमों की अनदेखी की जा रही है। ज्यादातर सेंटरों में लैब टैक्नीशियन ही रिपोर्ट जारी करते हैं, जबकि सैंपल आदि लेने के लिए प्रशिक्षित स्टाफ रखा जाता है। रिपोर्ट भी अनुबंधित पैथोलॉजिस्ट के डिजिटल सिग्नेचर से जारी होना चाहिए, लेकिन अधिकांशत: देखा गया है कि रिपोर्ट पर साधारण सील ठप्पा लगा दिया जाता है। डिजिटल सिग्नेचर जारी करने के भी नियम अलग हैं। सरकार के निर्देशों के बाद प्रशासनिक स्तर पर जब जांच दल ने भौतिक रूप से परीक्षण किया तो अनेक खामियां सामने आ गई। ज्यादातर सेंटरों में पैथोलॉजिस्ट मिले ही नहीं। उन्हें उपस्थित होने का समय दिए जाने के बावजूद वे नहीं पहुंचे। नियमानुसार एक पैथोलॉजिस्ट केवल खुद के सेंटर के अतिरिक्त एक और सेंटर पर ही सेवाएं दे सकता है किंतु कटनी में एक-एक पैथोलॉजिस्ट के नाम पर दर्जनों सेंटर चल रहे है। जांच में तो यहां तक बात सामने आई कि दूसरे जिले के पैथोलॉजिस्ट का अनुबंध करके रखा गया है। जांच दल ने अपनी रिपोर्ट एसडीएम को सौंपी और यहां से कार्यवाही के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ अधिकारी के पास गई। यशभारत द्वारा इस मामले को उठाए जाने के बाद सीएमएचओ ऑफिस हरकत में आया और एक्शन लिया गया।
अस्पतालों में चल रहे सेंटरों को भी लाया जाए जांच के दायरे में
खुले तौर पर पैथोलॉजी सेंटरों का बोर्ड लगाकर जांचे तो की जा रही है, किंतु शहर के निजी क्लीनिक, नर्सिंग होम्स और निजी अस्पतालों में चल रहे पैथोलॉजी सेंटरों का भी कमोवेश यही हाल है। इनमें भी पैथोलॉजिस्ट की नियुक्ति नहीं है। ये सेंटर भी लैब टैक्नीशियन के भरोसे ऑपरेट हो रहे हैं। इस लिस्ट में शहर के बड़े और प्रतिष्ठित कहे जाने वाले अस्पतालों के नाम है। क्या स्वास्थ विभाग इनके खिलाफ भी एक्शन लेने की हिमाकत कर पायेगा। अनेक मर्तबा इन सेंटरों से गलत रिपोर्ट मिलने की शिकायतें आ चुकी हैं। जबलपुर और नागपुर के अलावा दिल्ली और मुंबई के चिकित्सक तो सीधे तौर पर कटनी के पैथोलॉजी सेंटरों से मिलने वाली जांच रिपोर्ट को खारिज करते हुए फिर से टेस्ट कराते हैं। प्रशासन को उन सभी पैथोलॉजी सेंटरों पर लगाम कसनी चाहिए जो नियम विरुद्ध संचालित हो रहे हैं। उनकी संख्या दर्जनों या पचासों हो सकती है लेकिन लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने की छूट किसी को नहीं दी जा सकती।
8 सेंटरों के संचालकों ने कहा : बाकी पर भी हो एक्शन
जिन सेंटरों में नोटिस के बाद तालाबंदी हो चुकी है उनके संचालकों का कहना है कि पैथोलॉजी संचालक किसी न किसी विश्वविद्यालय से डिग्री प्राप्त कर शासन के नियमों के तहत काम कर रहे हैं। इनके पास पैरामेडिकल काउन्सिलिंग मप्र भोपाल, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी एवं प्रदूषण विभाग का लाइसेंस है। इसके अलावा माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के वर्ष 2006 के आदेशानुसार एमबीबीएस डॉक्टर के सुपरविजन में लैब का संचालन करने का उल्लेख है। इसी के अनुसार आज तक अपनी.अपनी पैथोलॉजी लैब का संचालन कर अपना एवं अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे और लैब में सहयोगी के रूप में एक दो सदस्यों को भी रोजगार दिया गया है। उनके ऊपर भी बेरोजगार होने का संकट खड़ा हो गया है। कहा गया है कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा सिर्फ 8 सेंटरों के विरुद्ध कार्यवाही की जा रही है जबकि नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत 50 पैथी लैब और निजी नर्सिंग होम के अंदर अनेक संचालित पैथो लैब संचालित है। इन पर भी एक्शन होना चाहिए।









