उपार्जन को 2 दिन शेष-न गोदामों का अता-पता, न स्लॉट की जानकारी
अपने-अपने केंद्रों की स्थापना की जुगत में अधिकारी,आपसी खींचतान में लगी जिला उपार्जन समिति

जबलपुर, यश भारत। कई बार तारीख बढ़ाने के बाद 15 अप्रैल से जिले में गेहूं उपार्जन शुरू होना है, लेकिन लगभग 15 दिन देरी से शुरू हो रहे उपार्जन में भी अभी तक न तो जिला उपार्जन समिति उपार्जन केंद्रों की स्थापना कर पाई है और न ही स्लॉट बुकिंग शुरू हो पाई है। इसके चलते किसान परेशान हो रहे हैं, जबकि अधिकारी आपसी खींचतान में उलझे हुए हैं। पिछले 15 दिनों से वेयरहाउस और समितियों की सूची एक टेबल से दूसरी टेबल तक घूम रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका है।
तीन दिन पहले शुरू हो जाती है स्लॉट बुकिंग
जबकि उपार्जन 15 अप्रैल से शुरू होना तय है, ऐसे में 12 अप्रैल से स्लॉट बुकिंग शुरू हो जानी चाहिए थी। किसानों को पहले केंद्रों की जानकारी मिलती है, तभी वे अपनी सुविधा अनुसार स्लॉट बुक कर पाते हैं। लेकिन जब तक गोदाम और केंद्रों का चयन ही नहीं हुआ है, तब तक स्लॉट बुकिंग संभव नहीं है। ऐसे में यदि 15 अप्रैल से खरीदी शुरू भी कर दी जाती है, तो किसान बिना स्लॉट बुकिंग के अपना गेहूं लेकर केंद्रों तक नहीं पहुंच पाएंगे, जिससे अव्यवस्था की स्थिति बन सकती है।
सजा रहे अपनी-अपनी ‘दुकान’
इस पूरे मामले में जिला उपार्जन समिति से जुड़े कुछ लोग अपने-अपने हित साधने में लगे हुए हैं। आरोप है कि अपने लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए लगातार मैपिंग में बदलाव कराया जा रहा है। इसमें वेयरहाउसिंग, फूड विभाग और कुछ जिला प्रशासन के अधिकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं। कलेक्टर के अवकाश पर होने का फायदा उठाकर नियमों को दरकिनार कर मैपिंग को प्रभावित करने की कोशिशें हो रही हैं, जिससे अब तक अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है।
वेयरहाउसिंग ने दी अधूरी जानकारी
जानकारी के अनुसार वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन द्वारा प्रस्तुत विवरण में भी कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को स्पष्ट नहीं किया गया है। गोदामों में कैमरे, चौकीदार और धर्मकांटा जैसी व्यवस्थाओं की जानकारी अधूरी बताई जा रही है। जिसके चलते बी और सी कैटेगरी की गोदाम को भी ए कैटिगिरी में डाल दिया गया है इसके अलावा पूर्व में धान उपार्जन में हुई अनियमितताओं और नाम परिवर्तन वाले गोदामों को लेकर भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। केवल नाम परिवर्तन का उल्लेख कर महत्वपूर्ण करण को नजरअंदाज किया गया है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।







