मध्य प्रदेशराज्य

वट सावित्री व्रत: पति की दीर्घायु और सुहाग की रक्षा का पर्व : सावित्री की अटूट निष्ठा और धर्मबल से यमराज भी हुए पराजित

सतना। ज्येष्ठ अमावस्या का दिन सौभाग्यवती स्त्रियों के लिए अत्यंत विशेष होता है। इस दिन महिलाएं वट सावित्री व्रत रखकर अपने पति की लंबी उम्र, सुख और समृद्धि की कामना करती हैं। यह व्रत सावित्री और सत्यवान की अमर गाथा पर आधारित है, जिसमें पत्नी की निष्ठा, धैर्य और साहस की अद्भुत मिसाल देखने को मिलती है।

धार्मिक मान्यता:
मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने वाली स्त्रियों को सावित्री जैसी दृढ़ता और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। महिलाएं व्रत रखकर वट वृक्ष की पूजा करती हैं, उसे सूती धागे से बांधती हैं, परिक्रमा करती हैं और व्रत कथा का श्रवण करती हैं।

सावित्री-सत्यवान की कथा:
राजा अश्वपति की पुत्री सावित्री ने अपने लिए सत्यवान को वर रूप में चुना, जो वन में अपने अंधे माता-पिता के साथ कष्टमय जीवन व्यतीत कर रहा था। नारद मुनि ने भविष्यवाणी की कि सत्यवान अल्पायु है, पर सावित्री अपने निर्णय से टस से मस न हुई।

विवाह के बाद एक दिन सत्यवान को जंगल में लकड़ी काटते समय तेज पीड़ा हुई और वह मूर्छित हो गया। उसी क्षण यमराज उसकी आत्मा लेने आए। सावित्री अपने पति के पीछे-पीछे यमराज के साथ चल पड़ी। यमराज ने उसे कई बार समझाया और वरदान भी दिए — पहले सास-ससुर की दृष्टि, फिर सौ पुत्रों का वरदान, लेकिन वह नहीं मानी।

जब यमराज ने कहा कि उसके पति के प्राण नहीं लौटा सकते, तब सावित्री ने युक्तिपूर्वक कहा, “बिना पति के मैं सौ पुत्रों की मां कैसे बन सकती हूं?” यमराज उसकी चतुरता, भक्ति और नारी धर्म से इतने प्रभावित हुए कि सत्यवान को जीवनदान दे दिया।

वर्तमान संदर्भ में प्रेरणा:
सावित्री की यह गाथा आज की नारी को भी प्रेरणा देती है कि श्रद्धा, प्रेम और संकल्प के साथ कोई भी कठिनाई पार की जा सकती है। यह पर्व न केवल एक धार्मिक परंपरा है, बल्कि नारी के आत्मबल और विवेक का उत्सव भी है।

पूजन विधि संक्षेप में:
प्रातः स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें।

वट वृक्ष के नीचे जल, फल, फूल, रोली, कच्चा दूध चढ़ाएं।

धागा बांधकर परिक्रमा करें (7, 11 या 21 बार)।

सत्यवान-सावित्री की कथा सुनें या पढ़ें।

दिनभर व्रत रखने के बाद सायंकाल पूजन कर व्रत पूर्ण करें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button