मध्य प्रदेशराज्य

12 दिन बाद टूटा अनशन : लिफ्ट इरीगेशन परियोजना के माध्यम से सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराए जाने की मांग को लेकर अनशन पर थी साध्वी गोस्वामी

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सिवनी यश भारत:-सिवनी जिले के आदिवासी बहुल विकासखंड घंसौर में 77 ग्राम पंचायतों में लिफ्ट इरीगेशन परियोजना के माध्यम से सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराए जाने की मांग को लेकर बीते 14 दिनों से तहसील कार्यालय के समीप अनशन पर बैठीं साध्वी ऋचा गोस्वामी ने आज शनिवार को अपना अनशन समाप्त कर दिया। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते द्वारा मांगों को लेकर आश्वासन दिए जाने के बाद साध्वी ने अनशन तोड़ा और इसके पश्चात अपनी अधूरी नर्मदा परिक्रमा पर आगे के लिए रवाना हो गईं।

दरअसल, घंसौर ग्रामीण क्षेत्र की 77 ग्राम पंचायतों में लिफ्ट इरीगेशन परियोजना के माध्यम से सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की लंबे समय से चली आ रही मांग को लेकर साध्वी ऋचा गोस्वामी अनशन कर रही थीं। क्षेत्र में सिंचाई के अभाव में किसानों को फसलों की पर्याप्त पैदावार नहीं हो पा रही थी, जिससे ग्रामीणों में असंतोष व्याप्त था। इसी मुद्दे को लेकर साध्वी ने शांतिपूर्ण अनशन का रास्ता अपनाया था।

शनिवार को घंसौर में सभी ग्राम पंचायतों के निवासियों द्वारा एक विशाल धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया गया था, जिसमें साध्वी के अनशन को समर्थन देने के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे। कार्यक्रम के दौरान मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते भी धरना स्थल पर पहुंचे और उन्होंने साध्वी ऋचा गोस्वामी से मुलाकात कर उनकी मांगों पर चर्चा की।
सांसद कुलस्ते ने मौके पर उपस्थित ग्रामीणों को संबोधित करते हुए बताया कि शासन स्तर पर लिफ्ट इरीगेशन परियोजना को लेकर कुछ व्यावहारिक विकल्पों पर विचार किया गया है और शीघ्र ही घंसौर क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने साध्वी से स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए अनशन समाप्त करने की अपील भी की।
सांसद के आश्वासन और स्थानीय लोगों की सहमति के बाद साध्वी ऋचा गोस्वामी ने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया। अनशन समाप्त होते ही उपस्थित ग्रामीणों ने राहत की सांस ली और साध्वी के प्रति समर्थन जताया। कार्यक्रम के समापन के बाद साध्वी ऋचा गोस्वामी अपनी अधूरी नर्मदा परिक्रमा को पूर्ण करने के उद्देश्य से आगे की यात्रा पर रवाना हो गईं।
इस घटनाक्रम को क्षेत्र में सिंचाई समस्या के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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