कटनीमध्य प्रदेश

सड़कों पर अतिक्रमण के चलते राहगीरों का पैदल चलना हुआ मुश्किल,

अब तक के सारे प्रयास नाकाफ़ी परेशान जनता को कैसे मिलेगी राहत

कटनी- शहर की सुंदरता पर अतिक्रमण सबसे बड़ा और गंभीर ग्रहण बन गया है। इसे दूर करने के लिए नगर निगम द्वारा किए गए अब तक के सारे प्रयास विफल साबित हुए हैं। शहर का ऐसा कोई हिस्सा नहीं है, जहां पर आवागमन सड़कें अतिक्रमण से आबाद न हों। शहर मुख्यालय में होने के बाद भी अतिक्रमण जैसी गंभीर बीमारी का स्थाई उपचार नहीं कर पाई है। शहर की सड़कें अतिक्रमण के दलदल में फंसने की वजह से राहगीरों का पैदल आवागमन करना तक मुश्किल साबित होता है।
तेज तर्रार आईएएस अफ़सर तपस्या परिहार
के निर्देश पर शहर के अंदर अतिक्रमण के खिलाफ निस्संदेह अभियान चलाया जाता है, लेकिन उसका असर एक दो दिन में ही छूमंतर हो जाता है। यही वजह है कि अतिक्रमण के चलते घरों से
निकलने वाली परेशान जनता को स्थाई राहत नसीब नहीं हो रही है। सुबह सूरज निकलने के साथ ही सड़‌कों पर अतिक्रमण का दीमक फैलने लगता है और दोपहर होते-होते हर सड़क पर यातायात व्यवस्था बेडियों में नजर आने लगती है, इस वजह से तमाम सड़कों पर लगने वाले जाम का सामना करने के लिए शहरवासियों को मजबूर होना पड़ जाता है। शहर में समय-समय पर जाम की वजह बनने वाले ठेलों को नगर पालिका की टीम हटाती है।आयुक्त के निर्देश पर जुर्माना भी लगाया जाता है, लेकिन शहर के हालात आज भी जस के तस बने हुए हैं। शहर में सुभाष चौक गोल बाजार झंडाबजार, सराफा बाजार घन्टाघर, अस्पताल रोड के साथ शहर का हरेक मार्ग बेजा अतिक्रमण से जूझ रहा है। अब सवाल यह उठता है कि क्या शहर की सड़कें कभी अतिक्रमण मुक्त हो पाएंगी या नहीं ?

बाजार क्षेत्र में लगा रहता है जाम

शहर का बाजार क्षेत्र अवैध कब्जे के कारण हमेशा जाम के झाम में फंसा रहता है। जगन्नाथ चौक से शुरू होने वाले बाजार क्षेत्र की हर सड़क ठेला वालों के अतिक्रमण की कहानी बयां करती है। दिन निकलने के साथ ही आधी सड़क पर ठेलों का जमघट बाजार की पहचान बन गई है। सुभास चौक से सब्जी मंडी और सराफा बाजार तरफ जाने वाली सड़क पर अवैध कब्जा होने के कारण पैदल चलना दुश्वार साबित होता है। यहां आए दिन राहगीर वाहनों की ठोकर लगने से चोटिल होते रहते हैं, जिसके कारण विवाद भी होता है। पुरानी सब्जी और फल मंडी की सड़क पर पक्की दुकान चलाने वाले दुकानदारों ने स्वयं ठेलों का सहारा ले रखा है। यह पूरा क्षेत्र नगर निगम के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

सड़कों पर यातायात व्यवस्था को चौपट कर आम की समस्या पैदा करने वाले ठेला वालों को व्यवस्थित करने के लिए नगर निगम द्वारा खाली जमीन पर पेवर ब्लाक लगवाकर व्यवस्था अवश्य बनाई है. लेकिन यहां पर एक भी ठेला खड़ा नहीं होता है। ठेला व्यापारियों का कहना है कि उक्त स्थान पर बिजली, पानी और सुरक्षा की कोई सुविधा नहीं है। बरसात में पानी भरना भी यहां की समस्या रही है। नगर निगम को निर्धारित स्थान पर सुलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराते हुए बल पूर्वक ठेला वाले को बसाने का अभियान चलाता होगा, तभी सड़कों की हालत सुधरेगी।

क्या कहते है नागरिक

शहर की सड़‌कों पर हर तरफ ठेलों की मौजूदगी यातायात को बाधित करती है, जिसके कारण लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
नगर निगम अतिक्रमण को लेकर ठोस कार्यवाही से सदैव बचती रही है। केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए कार्यवाही करने से हालात सुधरने वाले नहीं है।

राजेश भारद्वाज
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बाजार सहित शहर के अन्य हिस्से में

सड़कों को बाधित करने वाले ठेला वालों के लिए स्थान निधर्धारित करना होगा। इसके बाद भी न मानें तो कड़ी कार्रवाई बेहद जरूरी है।

सुरेंद्र मिश्रा गुल्लू
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इनका कहना
सख़्ती की जाएगी.….

सड़कों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए नगर पालिका निरंतर प्रयास करती है। जुर्माना लगाने और शिकायत के बाद भी ठेला वाले नहीं सुधर रहे हैं। निर्धारित स्थान पर उन्हें जाना होगा, वरना सामग्री जफ़्ती के साथ-साथ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

तपस्या परिहार
आयुक्त

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