सडक़ से कमाई का नया फार्मूला अपनाया एनएचएआई ने रीवा-कटनी-जबलपुर-लखनादौन हाइवे अब निजी हाथों में 20 साल तक मेंटेनेंस एवं टोल वसूली करेगी एनएचएआई की निजी कंपनी

कटनी, यशभारत। कटनी-रीवा-जबलपुर नेशनल हाईवे को नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इण्डिया ने निजी कंपनी को सौंप दिया है। एक जानकारी में यह मामला प्रकाश में आया है। बताया जाता हैं कि ये निजी कंपनी एनएचएआई की ही है, जिसको यह जिम्मेदारी 20 साल के लिए दी गई है। जानकारी के मुताविक लखनादौन तक 306 किलोमीटर का यह हाईवे 5 साल पहले 2700 करोड़ की लागत से निर्मित किया गया था, जिसको 3500 करोड़ में एक मुश्त रकम प्राप्त कर दिया गया है। जिस कंपनी को दिया गया है, वह इनविट यानी इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश ट्रस्ट है। यही कंपनी अगले दो दशक तक इस हाईवे में टोल वसूली के साथ सभी तरह का मेंटेनेंस करेगी। इसकी निगरानी एनएचएआई के अधिकारी करेंगे। इसमें खास बात यही है कि इसमें किसी तरह से टोल के अतिरिक्त वसूली नहीं हो सकती, जो टोल की दर एनएचएआई निर्धारता करता है उसी हिसाब से टोल लिया जाएगा। कंपनी को मार्ग पर रेलिंग, डिवाइडर, सूचना फलक, प्लांटेशन, सडक़ खराब होने पर उसकी मरम्मत सभी वो काम करने होंगे जिससे यह हाईवे दुरुस्त और उम्दा बना रहे हैं। सूत्र कहते हैं कुल 306 किलोमीटर की सडक़ में अभी लखनादौन वाला हिस्सा दे दिया गया है। कटनी-रीवा वाले हिस्से भी इसी माह कंपनी को दे दिए जाएंगे।
हाईवे के ये हिस्से हैं निजी हाथों में
224 किलोमीटर सडक़ में सिहोरा, कटनी से आगे रीवा तक कुल 4 टोल हैं। सडक़ के इस सीमा क्षेत्र के कटनी के नजदीक है। खेरवासानी टोल अंतिम हिस्सा रीवा के नजदीक का टोल है।
क्या है फार्मूला
किसी भी हाईवे को जब निजी हाथों में एनएचएआई सौंपता है तो उसमें कंपनी से एक मुश्त रकम प्राप्त की जाती है। इस रकम को एक बार में मिलने पर किसी और बड़ी सडक़ पर निवेश कर दिया जाता है। इसमें एनएचएआई मेंटेनेंस की जिम्मेदारी से भी मुक्त हो जाती है। पीपी मोड पर प्रोजेक्ट निजी हाथों में दिया जाता है।
एनएचएआई की खुद की कंपनी है इनविट
जो कंपनी सडक़ का मेंटेनेंस करेगी वह इन्फ्राट्रक्चर निवेश ट्रस्ट आईएनवीआईटी है। यह म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट के समान काम करती है। यह इन्फ्राट्रक्चर डेवलपर्स को लंबी अवधि के इन्फ्राट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में पड़ी कैपिटल को रीसाइकिल करने में मदद करती है। इन प्रोजेक्ट्स में सडक़ें, ट्रांसमिशन लाइन या रीन्यूएबल असेट्स शामिल होते हैं। इस कंपनी में 15 प्रतिशत हिस्सेदारी एनएचएआई की है तो 85 फीसदी प्राइवेट की। इसमें 85 फीसदी में भी 50 फीसदी बैंकर्स हैं।कटनी, यशभारत। कटनी-रीवा-जबलपुर नेशनल हाईवे को नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इण्डिया ने निजी कंपनी को सौंप दिया है। एक जानकारी में यह मामला प्रकाश में आया है। बताया जाता हैं कि ये निजी कंपनी एनएचएआई की ही है, जिसको यह जिम्मेदारी 20 साल के लिए दी गई है। जानकारी के मुताविक लखनादौन तक 306 किलोमीटर का यह हाईवे 5 साल पहले 2700 करोड़ की लागत से निर्मित किया गया था, जिसको 3500 करोड़ में एक मुश्त रकम प्राप्त कर दिया गया है। जिस कंपनी को दिया गया है, वह इनविट यानी इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश ट्रस्ट है। यही कंपनी अगले दो दशक तक इस हाईवे में टोल वसूली के साथ सभी तरह का मेंटेनेंस करेगी। इसकी निगरानी एनएचएआई के अधिकारी करेंगे। इसमें खास बात यही है कि इसमें किसी तरह से टोल के अतिरिक्त वसूली नहीं हो सकती, जो टोल की दर एनएचएआई निर्धारता करता है उसी हिसाब से टोल लिया जाएगा। कंपनी को मार्ग पर रेलिंग, डिवाइडर, सूचना फलक, प्लांटेशन, सडक़ खराब होने पर उसकी मरम्मत सभी वो काम करने होंगे जिससे यह हाईवे दुरुस्त और उम्दा बना रहे हैं। सूत्र कहते हैं कुल 306 किलोमीटर की सडक़ में अभी लखनादौन वाला हिस्सा दे दिया गया है। कटनी-रीवा वाले हिस्से भी इसी माह कंपनी को दे दिए जाएंगे।
हाईवे के ये हिस्से हैं निजी हाथों में
224 किलोमीटर सडक़ में सिहोरा, कटनी से आगे रीवा तक कुल 4 टोल हैं। सडक़ के इस सीमा क्षेत्र के कटनी के नजदीक है। खेरवासानी टोल अंतिम हिस्सा रीवा के नजदीक का टोल है।
क्या है फार्मूला
किसी भी हाईवे को जब निजी हाथों में एनएचएआई सौंपता है तो उसमें कंपनी से एक मुश्त रकम प्राप्त की जाती है। इस रकम को एक बार में मिलने पर किसी और बड़ी सडक़ पर निवेश कर दिया जाता है। इसमें एनएचएआई मेंटेनेंस की जिम्मेदारी से भी मुक्त हो जाती है। पीपी मोड पर प्रोजेक्ट निजी हाथों में दिया जाता है।
एनएचएआई की खुद की कंपनी है इनविट
जो कंपनी सडक़ का मेंटेनेंस करेगी वह इन्फ्राट्रक्चर निवेश ट्रस्ट आईएनवीआईटी है। यह म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट के समान काम करती है। यह इन्फ्राट्रक्चर डेवलपर्स को लंबी अवधि के इन्फ्राट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में पड़ी कैपिटल को रीसाइकिल करने में मदद करती है। इन प्रोजेक्ट्स में सडक़ें, ट्रांसमिशन लाइन या रीन्यूएबल असेट्स शामिल होते हैं। इस कंपनी में 15 प्रतिशत हिस्सेदारी एनएचएआई की है तो 85 फीसदी प्राइवेट की। इसमें 85 फीसदी में भी 50 फीसदी बैंकर्स हैं।








