शिव की आराधना नर्मदा का पावन तट और शक्ति की उपासना का संगम, सावन का आखिरी सोमवार कल

जबलपुर यश भारत।श्रावण’ यानी सावन माह में भगवान शिव की अराधना का विशेष महत्त्व है। इस माह में पड़ने वाले सोमवार “सावन के सोमवार” कहे जाते हैं, जिनमें स्त्रियाँ तथा विशेषतौर से कुंवारी युवतियाँ भगवान शिव के निमित्त व्रत आदि रखती हैं। इस वर्ष सावन महीने का आखिरी सोमवार कल 4 अगस्त को है। इस पुनीत अवसर पर कल शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक में विशेष पूजन अर्चन अनुष्ठान की कार्यक्रम आयोजित होंगे। सावन के आखिरी सोमवार को शहर के प्राचीन और और प्रसिद्ध शिव मंदिरों के अलावा उप नगरीय क्षेत्र और ग्रामीण अंचलों के देवस्थानों पर भी पूजा के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमडेगा। इसके अलावा पवन नर्मदा तटों पर पवित्र स्नान के लिए भक्तों की भीड़ रहेगी। संस्कारधानी में सावन के महीने में मदन महल की पहाड़ियों पर स्थित ऐतिहासिक और गोंडवाना कालीन शारदा देवी मंदिर में भी परंपरागत मेला के अलावा जुलूस की शक्ल में झंडा चढ़ाने वालों की कतारे नजर आएंगी। मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना गोंडवाना काल में स्वयं रानी दुर्गावती ने कराई थी। और तभी से यहां पर ध्वजा चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है जो आज भी जारी है। शारदा देवी के इस प्राचीन मंदिर को शक्ति स्वरुप में भी पूजा जाता है और मंदिर के प्रति लोगों की गहरी आस्था भी है। सावन का महीना हो और मात्र नर्मदा की चर्चा ना हो ऐसा भी नहीं हो सकता क्योंकि कहा जाता है कि नर्मदा का हर कंकड़ शंकर है। नर्मदा तट पर बसे संस्कारधानी के लोगों की नर्मदा के प्रति गहरी आस्था है। वैसे तू यहां प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग स्नान और पूजन करने के लिए पहुंचते हैं लेकिन त्योहारों के मौके पर यहां पर श्रद्धालुओं का रेला सा नजर आता है। कल सावन का आखिरी सोमवार है इसलिए नर्मदा तटों पर भी भारी भीड़ उमडने वाली है। इसमें वह कावड़ यात्री भी होंगे जिन्होंने अब तक नर्मदा के पावन जल से भगवान भोलेनाथ का अभिषेक नहीं किया है वह भी बड़ी संख्या में कल नर्मदा जल लेने नर्मदा तट खासकर ग्वारीघाट पहुंचेंगे और वहां से कावड़ भरकर शिव मंदिरों की ओर रवाना होगे।
सावन सोमवार का महत्त्व
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श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को शिव के निमित्त व्रत किए जाते हैं। इस मास में शिव जी की पूजा का विशेष विधान हैं। कुछ भक्त तो पूरे मास ही भगवान शिव की पूजा-आराधना और व्रत करते हैं। अधिकांश व्यक्ति केवल श्रावण मास में पड़ने वाले सोमवार का ही व्रत करते हैं। श्रावण मास के सोमवारों में शिव के व्रतों, पूजा और शिव जी की आरती का विशेष महत्त्व है। शिव के ये व्रत शुभदायी और फलदायी होते हैं।
नर्मदा नदी के हर पत्थर में हैं शिव.
प्राचीनकाल में नर्मदा नदी ने बहुत वर्षों तक तपस्या करके ब्रह्माजी को प्रसन्न किया। प्रसन्न होकर ब्रह्माजी ने वर मांगने को कहा।
नर्मदाजी ने कहा:- ब्रह्मा जी! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो मुझे गंगाजी के समान कर दीजिए।
ब्रह्माजी ने मुस्कराते हुए कहा – ’यदि कोई दूसरा देवता भगवान शिव की बराबरी कर ले, कोई दूसरा पुरुष भगवान विष्णु के समान हो जाए, कोई दूसरी नारी,पार्वतीजी की समानता कर ले और कोई दूसरी नगरी काशीपुरी की बराबरी कर सके तो कोई दूसरी नदी भी गंगा के समान हो सकती है।ब्रह्माजी की बात सुनकर नर्मदा उनके वरदान का त्याग करके काशी चली गयीं और वहां पिलपिलातीर्थ में शिवलिंग की स्थापना करके तप करने लगीं।भगवान शंकर उनपर बहुत प्रसन्न हुए और वर मांगने के लिए कहा।
नर्मदा ने कहा – भगवन्! तुच्छ वर मांगने से क्या लाभ?
बस आपके चरणकमलों में मेरी भक्ति बनी रहे। नर्मदा की बात सुनकर भगवान शंकर बहुत प्रसन्न हो गए और बोले – नर्मदे! तुम्हारे तट पर जितने भी प्रस्तरखण्ड (पत्थर) हैं, वे सब मेरे वर से शिवलिंगरूप हो जाएंगे। गंगा में स्नान करने पर शीघ्र ही पाप का नाश होता है,यमुना सात दिन के स्नान से और सरस्वती तीन दिन के स्नान से सब पापों का नाश करती हैं परन्तु तुम दर्शनमात्र से सम्पूर्ण पापों का निवारण करने वाली होगी। तुमने जो नर्मदेश्वर शिवलिंग की स्थापना की है, वह पुण्य और मोक्ष देने वाला होगा। भगवान शंकर उसी शिवलिंग में लीन हो गए। इतनी पवित्रता पाकर नर्मदा भी प्रसन्न हो गयीं। इसलिए कहा जाता है ‘नर्मदा का हर कंकर शिव शंकर है।







