कटनी

विडम्बना : शिक्षा पर करोड़ों खर्च, फिर भी स्कूलों की दुर्दशा, कैमोर की घटना के बाद भी सबक नहीं लिया प्रशासन ने, खंडहर नुमा भवन में पढऩे के लिए मजबूर नौनिहाल, बच्चों को भेजने से कतरा रहे अभिभावक, जिले में स्कूल भवनों की हालत बदतर

कटनी, यशभारत। शिक्षा पर करोड़ों रूपए खर्च करने के बाद भी स्कूलों के हाल-बेहाल है। कैमोर के बम्हनगवां स्कूल में जर्जर बाउण्ड्रीवॉल गिरने से एक छात्र की मौत होने के बाद भी जिले का शिक्षा विभाग गहरी निद्रा से नहीं जागा है। आलम यह है कि शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी तदात में ऐसे स्कूल हैं, जो कि जर्जर और खस्ताहाल हो चुके हैं लेकिन इसके बाद भी शिक्षा विभाग के अधिकारी मूकदर्शक बनकर तमाशा देख रहे हैं। कई स्कूलों की हालत बद से बदत्तर हो चुकी है। इसके बाद भी इन स्कूलों में खुलेआम कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। स्कूलों भवनों की जर्जर हालत को सुधारने के लिए प्रदेश सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा हर साल भारी भरकम राशि आवंटित की जाती है। इस राशि का उपयोग कहां हो रहा है, यह शिक्षा विभाग के अधिकारी ही बता सकते हैं। जिला मुख्यालय से मात्र 18 किलोमीटर की दूरी पर कटनी विकासखंड के अंतर्गत ग्राम कन्हवारा से लगे छैघरा टोला में संचालित प्राथमिक शाली की हालत किसी खंडहर नुमा भवन जैसी हो गई है। जर्जर भवन कभी भी गिर सकता है लेकिन विभाग के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे। ऐसा लगता है, जैसे कैमोर की घटना से अधिकारियों ने कोई सबक नहीं लिया। प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदयप्रताप सिंह के प्रभार वाले कटनी जिले में स्कूलों की दुर्दशा के बाद प्रशासन और शिक्षा विभाग द्वारा आवश्यक कदम नहीं उठाए जा रहे। सरकार और शिक्षा विभाग भले ही सरकारी स्कूलों में शिक्षा स्तर और सुविधाओं में सुधार के दावे कर रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। जिले के सैकड़ों शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। कहीं बच्चों के बैठने के लिए पक्की छत नहीं है तो कहीं शुद्ध पेयजल तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा।
पहली से पांचवी तक मात्र 12 बच्चे
ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम छैघराटोला में प्राथमिक विद्यालय का संचालन किया जा रहा है। यहां कक्षा पहली से पांचवी तक की कक्षाएं लगती हैं। स्कूल की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि गांव के लोग भी अपने बच्चों का दाखिला इस स्कूल में नहीं करा रहे। यही कारण है कि पहली से पांचवी तक की कक्षाओं में बच्चों की दर्ज संख्या मात्र 12 है। इन 12 बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग ने दो शिक्ष्कों को नियुक्त किया है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कईयों बार स्कूल भवन की मरम्मत कराने के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों का ध्यान आत्कष्ट कराया, इसके बाद भी अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। जिससे स्कूल भवन की स्थिति दिन प्रतिदिन और भी खस्ताहाल होती जा रही है। बच्चों की मजबूरी यह है कि उन्हें अपनी जान जोखिम में डालकर शिक्षा ग्रहण करनी पड़ रही है।
8 स्कूलों में चल रहा निर्माण
जिले के 8 हाई व हॉयर सेकंडरी स्कूल ऐसे हैं, जो जर्जर हालत में थे, जिनकी मरम्मत शिक्षा विभाग द्वारा कराई जा रही है, हालांकि इनमें से अधिक ऐसे हैं, जिनका नवीन निर्माण हो रहा है। इसमें भजिया, पिपरौंध, बरहाटा, कुठला, पठरा, देवराखुर्द, जोबीकलां, निटर्रा स्कूल शामिल हैं, जहां पर निर्माण कराया जा रहा है।
104 की मरम्मत, 172 में स्वीकृति की दरकार
बड़वारा विकाखखंड के अंतर्गत आने वाले 6 स्कूलों में प्रसाधन की सुविधा नहीं है, जिनके निर्माण की प्रक्रिया शुरू कराई गई है। इसके अलावा 104 प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों के प्रसाधन जर्जर हो गए थे, जिनके मरम्मत के लिए राशि जारी की गई है। कई जगह पर काम शुरू कराने का दावा शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने किया है। इसके अलावा 172 स्कूलों की सूची मरम्मत कराने के प्रस्ताव की सूची राज्य शिक्षा केंद्र भेजी गई है, अभी स्वीकृति का इंतजार है। 8 मार्च के पहले स्कूलों के प्रसाधनों की मरम्मत कराये जाने का दावा किया जा रहा है।
एक नजर इधर भी
प्राथमिक स्कूल – 1278
माध्यमिक स्कूल – 531
हाइस्कूल – 90
हॉयरसेकंडरी स्कूल – 86
कुल सरकारी स्कूल – 1985
कुल बच्चे -1 लाख 57 हजारIMG 20260224 125919 IMG 20260224 125907IMG 20260224 WA0024

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