कटनीमध्य प्रदेश

विकलांग की सहायता राशि पर डाका! 2 लाख का घोटाला, शपथ पत्र से खुला नया राज

लाभार्थी ने लगाया गबन का आरोप, खातेधारक बोला—“पैसा कैसे आया पता नहीं, 1.40 लाख निकलवा लिए

लाभार्थी ने लगाया गबन का आरोप, खातेधारक बोला—“पैसा कैसे आया पता नहीं, 1.40 लाख निकलवा लिएÒ”

कटनी, यशभारत।विजयराघवगढ़। गरीब और विकलांगों के लिए चलाई जा रही सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम सलैया बड़गैयां के भोला भूमिया की 2 लाख रुपये की स्वीकृत अपंगता सहायता राशि कथित रूप से दूसरे व्यक्ति के खाते में पहुंचने का मामला अब नया मोड़ ले चुका है। आरोप है कि भुगतान से पहले योजना प्रभारी द्वारा मूल पासबुक का सत्यापन किए बिना ही राशि ट्रांसफर कर दी गई।
भोला भूमिया के अनुसार उन्होंने वर्ष 2022 में म.प्र. भवन एवं अन्य निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल योजना के तहत अपंगता सहायता राशि के लिए आवेदन किया था। राशि स्वीकृत होने के बावजूद उनके खाते में पैसा नहीं आया। बाद में जानकारी मिली कि 2 लाख रुपये की पूरी राशि भीखम ढीमर के खाते में पहुंच गई। आरोप है कि वहां से शाखा प्रभारी फूलचंद्र पयासी द्वारा अलग-अलग माध्यमों से रकम ली गई—कुछ नगद और कुछ अन्य तरीकों से। खातेधारक द्वारा बैंक स्टेटमेंट भी निकलवाया गया है।
भोला का आरोप है कि गरीब और विकलांग लाभार्थियों को गुमराह कर योजनाओं की राशि हड़पी जा रही है और हर हितग्राही से 30–40 हजार रुपये तक की अवैध वसूली की जाती है।
मामले में नया मोड़ तब आया जब भीखम ढीमर ने एसपी कार्यालय में शपथ पत्र देकर कहा कि उसे यह जानकारी ही नहीं है कि उसके खाते में यह राशि कैसे आई। उसने आरोप लगाया कि पैसा खाते में आने के बाद विभाग से जुड़े फूलचंद्र पयासी ने उससे 1 लाख 40 हजार रुपये निकलवा लिए, जबकि शेष 60 हजार रुपये किसी अन्य व्यक्ति द्वारा ले लिए गए।
इस पूरे प्रकरण ने सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। मामला सामने आने के बाद जिला पंचायत सीईओ ने कहा है कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है और जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल गरीब और विकलांग के हक की इस राशि को लेकर उठे इस विवाद ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और योजनाओं की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। अब सबकी नजर जांच और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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