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विंध्य प्रदेश की यह धरती साहित्य, संगीत और साधना की अनेक कहानियों की जन्मभूमि है : पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

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रीवा lभारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अल्प प्रवास पर रीवा पहुंचे. वह रीवा के कृष्णा राजकपूर ऑडिटोरियम मे अखिल भारतीय साहित्य परिषद के 17वें त्रिवार्षिक अधिवेशन में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए. पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आयोजन का शुभारंभ किया. राष्ट्रगान के आयोजन से कार्यक्रम की शुरुआत हुइ l

कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला विशिष्ट अतिथि रहे. जबकि अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुशीलचंद्र त्रिवेदी “मधुपेश” ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की. इस कार्यक्रम में देश के अलग-अलग 30 राज्यों से आए 1200 से अधिक साहित्यकारों ने भाग लिया इसके अलावा 20 से अधिक पद्म विभूषण से सम्मानित विभूतियां शामिल हुईl

अखिल भारतीय साहित्य परिषद कार्यक्रम में शामिल हुए भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंच से लोगो को संबोधित करते हुए साहित्यकारों की प्रशंसा की. उन्होने कहा कि गुलाब के फूल में कांटे पहले आते हैं और फूल बाद में, यह भी सत्य हैं.

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि रीवा की इस पावन धरती पर आकर मुझे बड़ी प्रसन्नता हुई. विंध्य प्रदेश की यह धरती साहित्य, संगीत और साधना की अनेक कहानियों की जन्मभूमि है. मशहूर तानसेन और बेबाकी के लिए प्रख्यात बीरबल भी इसी विंध्य की धरती से हैं. विंध्य प्रदेश की इसी धरती पर राजा विश्वनाथ सिंह के द्वारा हिंदी भाषा के पहले नाटक की रचना की गई. सूर्यबली सिंह, सैफुद्दीन सहित अन्य साहित्यकारों ने अपने लेखन से भारतीय साहित्य को समृद्ध किया है. इस खास मौके पर इन सभी विभूतियों का आज हम स्मरण कर रहें हैं. ऐसे सांस्कृतिक आध्यात्मिक और साहित्यिक वैभव से परिपूर्ण रीवा नगरी में इस आयोजन के लिए सभी पदाधिकारियों को साधुवाद देता हूं.

पूर्व राष्ट्रपति ने आगे कहा कि हम सबके लिए यह और भी गौरव की बात है कि रीवा की इस पावन धरती के सैनिक स्कूल में शिक्षित हमारे देश की सेना का नेतृत्त्व जरनल उपेंद्र द्विवेदी कर रहे हैं. साथ ही भारतीय नौसेना की कमान संभाल रहे एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी जैसे दूरदर्शी और साहसी अधिकारी देश के पास हैं. ये दोनों रीवा ही नहीं बल्कि समस्त राष्ट्र के लिए गौरव और प्रेरणा के श्रोत हैं. हम उनके उज्जवल भविष्य और सफल नेतृत्व की कामना करते हैं.

भारतीय थल सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी और नौसेना प्रमुख दिनेश कुमार त्रिपाठी को लेकर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि इन दोनों अधिकारियों से कई मायने में मेरा संपर्क रहा है. उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने सफेद शेर का उल्लेख किया था और यह बात सही भी है कि रीवा की धरती इसके लिए काफी प्रसिद्ध भी हैं. मैं यह जरूर कहूंगा कि मैं जब भी एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी से मिलता हूं तो मुझे रीवा की और व्हाइट टाइगर की याद आती है. क्योंकि एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी भी हमेशा व्हाइट ड्रेस में रहते हैं.

रामनाथ कोविंद ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी हमारी मानसिक गुलामी तुरंत समाप्त नहीं हुई. हमें स्वतंत्रता 1947 में मिली थी लेकिन हमारी मानसिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता की प्रक्रिया धीमी रही. मुझे इस बात से प्रसन्नता होती है कि पिछले कुछ दशकों में यह स्थिति धीरे-धीरे बदल रही है. भारतीय सभ्यता की यह विशेषता है कि अंधकार में डूब कर भी प्रकाश की खोज नहीं छोड़ती. आज भारत पुनः अपनी विरासत से जुड़ रहा है और अपनी विरासत पर गर्व कर रहा है. साथ ही आत्मबोध को पुनर्स्थापित करने की दिशा मे तेजी से आगे बढ़ रहे हैंl

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