सागर यश भारत (संभागीय ब्यूरो)/ बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) के 28 लैब टेक्नीशियनों के जीवन में 14 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार न्याय का सवेरा हुआ है। इस कानूनी महासंग्राम में सागर की लाडली बिटिया और सुप्रीम कोर्ट की प्रखर अधिवक्ता समृद्धि जैन ने अपनी प्रतिभा और तर्कों से वह ऐतिहासिक जीत हासिल की। इस जीत ने न केवल 28 परिवारों का भविष्य सुरक्षित किया, बल्कि पूरे शहर और प्रदेश का नाम रोशन कर दिया।
सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में 2010 में 28 लैब टेक्नीशियनों की भर्ती प्रक्रिया द्वारा पदस्थ किया गया था। लेकिन तीन साल की सेवा के बाद अनियमितता का हवाला देकर इन्हें पद से पृथक कर दिया गया था। बीएमसी प्रबंधन के इस आदेश के खिलाफ ये कर्मचारी हाई कोर्ट पहुंचे, जहाँ सिंगल बेंच ने भर्ती को सही ठहराते हुए उन्हें पूर्ण वेतन और सभी लाभों के साथ सेवा में बहाल करने का आदेश दिया था। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के उक्त निर्णय के खिलाफ जबलपुर हाई कोर्ट की डबल बेंच में चुनौती दी, तो वहां भी फैसला लैब टेक्नीशियनों के हक में ही आया। अंततः, अधिकारों की प्राप्ति में हो रही देरी और अवमानना की स्थिति के बीच यह मामला देश की सर्वोच्च अदालत, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
धारदार बहस: पहले ही दिन पस्त हुआ विपक्ष
सुप्रीम कोर्ट में लैब टेक्नीशियनों की ओर से पैरवी करते हुए एडवोकेट समृद्धि जैन ने केस के प्रथम दिवस ही विपक्ष के वकीलों के तर्कों को अपनी कानूनी सूझबूझ से धराशायी कर दिया। उनकी पुरजोर बहस का परिणाम यह रहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने समस्त लैब टेक्नीशियनों के अधिकारों को सुरक्षित रखते हुए उनके पक्ष में फैसला सुनाया। इस बड़ी जीत के बाद बीएमसी के कर्मचारियों ने मुक्त कंठ से समृद्धि जैन का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें इस जीत का वास्तविक नायक बताया है।
एडवोकेट समृद्धि जैन पूर्व विधायक सुनील जैन एवं ‘आचरण’ हिंदी दैनिक की प्रबंध संपादक निधि जैन की सुपुत्री हैं। उनकी शैक्षणिक और पेशेवर उपलब्धियां सागर के लिए गौरव का विषय हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में ‘Advocate on Record’ की कठिन परीक्षा नेशनल मेरिट के आधार पर पहले ही प्रयास में क्लियर की है। पिछले 9 वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहीं समृद्धि जैन ने कई पेचीदा और महत्वपूर्ण मामलों में मध्यप्रदेश के नागरिकों को न्याय दिलवाकर अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है।
सुप्रीम कोर्ट में मिली यह जीत केवल 28 कर्मचारियों की नहीं, बल्कि उस संकल्प की जीत है जिसे समृद्धि जैन ने सर्वोच्च न्यायालय की दहलीज पर पूरी मजबूती से रखा। सागर की इस होनहार बिटिया ने साबित कर दिया है कि यदि इरादे नेक और मेहनत सच्ची हो, तो न्याय मिलने में देर भले ही हो, पर अंधेर नहीं।
Back to top button