सागर यश भारत (संभागीय ब्यूरो) / झीलों की नगरी सागर का हृदय स्थल ‘तीनबत्ती’ उस समय रणक्षेत्र में तब्दील हो गया जब भाजपा और कांग्रेस के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। भाजपा जहाँ दिल्ली की एक वर्कशॉप में यूथ कांग्रेस द्वारा किए गए प्रदर्शन को देश की छवि धूमिल करने वाला बताकर कांग्रेस कार्यालय का घेराव करने निकली थी, वहीं कांग्रेस ने भी भाजपा को जवाब देने के लिए कांग्रेस कार्यालय के बाहर तगड़ी मोर्चाबंदी कर ली। भाजपा और कांग्रेस की घेराव व पुतला दहन की इस राजनीति ने ऐसा उग्र रूप अख्तियार लिया कि राजनैतिक शिष्टाचार पूरी तरह तार-तार हो गया। पुतला दहन और घेराव को लेकर हुए इस टकराव में न केवल मर्यादाएं लांघी गईं, बल्कि सड़कों पर जूते-चप्पल, कुर्सियां और झाड़ू तक चले। पुलिस के वाटर कैनन भी कार्यकर्ताओं के उबलते खून को ठंडा नहीं कर पाए।
इस हंगामे के पहले जिला शहर कांग्रेस कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक भी संपन्न हुई। जिसमें प्रदेश प्रभारी जितेंद्र जैन ‘क्रांतिकारी’ और पूर्व अध्यक्ष डॉ. आनंद अहिरवार ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की भाषा शैली पर हमला बोलते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग की। अमित रामजी दुबे ने कहा कि “हम गोरों से लड़े हैं, तो इन चोरों से क्या डरेंगे।” बैठक में आगामी 24 फरवरी को भोपाल में राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी की उपस्थिति में होने वाले कार्यक्रम लेकर रणनीति तैयार की गई, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय कांग्रेसजनों के शामिल होने का दावा किया गया है।
भाजपा का तीखा प्रहार: विधायक और जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में घेराव
इसी बीच, भारतीय जनता युवा मोर्चा के आह्वान पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस कार्यालय का घेराव करने के लिए विशाल रैली निकाली। इस प्रदर्शन का नेतृत्व विधायक शैलेंद्र जैन और भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी कर रहे थे। भाजपा का मुख्य विरोध दिल्ली की एआई वर्कशॉप में यूथ कांग्रेस की कथित अमर्यादित हरकत को लेकर था। विधायक शैलेंद्र जैन और जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी की मौजूदगी में भाजपा कार्यकर्ता बेहद उग्र नजर आए। उन्होंने पुलिस की बैरिकेडिंग को ध्वस्त करते हुए कांग्रेस कार्यालय की ओर बढ़ने का पुरजोर प्रयास किया।
लेकिन भाजपा की इस घेराबंदी के जवाब में कांग्रेस ने जो जवाबी मोर्चाबंदी की, उसने सत्ता पक्ष के रणनीतिकारों के भी पसीने छुड़ा दिए। हाथों में झंडे और डंडे लिए कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस कार्यालय के बाहर ऐसा चक्रव्यूह रचा कि भाजपाइयों की घेराव की योजना धरी की धरी रह गई।
भाजपा द्वारा कांग्रेस कार्यालय के घेराव की कोशिश से भड़के कांग्रेसियों ने बैठक को बीच में ही खत्म कर शहर अध्यक्ष महेश जाटव के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यालय के बाहर मोर्चा संभाल लिया। शहर अध्यक्ष महेश जाटव ने हुंकार भरते हुए कहा कि, “अगर भाजपाई कार्यालय तक आए, तो हम उनके जनप्रतिनिधियों के घर के सामने पुतले जलाएंगे।”
जैसे ही दोनों पक्ष आमने-सामने आए दोनों पक्षों में भारी नारेबाजी हुई जो बाद में गाली-गलौज और धक्का-मुक्की में बदल गई। देखते ही देखते हवा में जूते, चप्पल और कुर्सियां तैरने लगीं। भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद कार्यकर्ता एक-दूसरे पर हमलावर होते रहे। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए जमकर वाटर कैनन (पानी की बौछार) का प्रयोग किया, लेकिन प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे।
रेखा चौधरी के नेतृत्व में ‘झाड़ू’ लेकर उतरी कांग्रेस की शेरनियां
मोर्चाबंदी के दौरान प्रदेश कांग्रेस महासचिव व पूर्व जिला अध्यक्ष रेखा चौधरी सबसे प्रभावशाली भूमिका में नजर आई और का रौद्र रूप देखने को मिला। वे केवल रणनीति तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि महिलाओं के एक विशाल हुजूम के साथ हाथों में झाड़ू थामकर खुद अग्रिम पंक्ति में सड़क पर डट गईं। जैसे ही भाजपा के कुछ उत्साही कार्यकर्ता बैरिकेड्स तोड़कर कांग्रेस कार्यालय के समीप पहुंचे, उन्हें रेखा चौधरी और उनकी महिला ब्रिगेड के झाड़ू हमलों का सामना करना पड़ा। यह दृश्य देख मौके पर मौजूद लोग दंग रह गए, जहाँ सत्ता के अहंकार को ‘झाड़ू’ के देसी प्रहार से पीछे हटने पर मजबूर कर दिया गया। इस दौरान रेखा चौधरी की पुलिस बल के साथ भी तीखी झड़प और धक्का-मुक्की हुई। उन्होंने साफ कर दिया कि सत्ता के इशारे पर किया जा रहा पुलिसिया दमन और भाजपाइयों की गुंडागर्दी कांग्रेस की महिला शक्ति बर्दाश्त नहीं करेगी।
त्रिलोकीनाथ कटारे की पुलिस को दो-टूक चेतावनी
इस भीषण हंगामे में जब पुलिस ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर सख्ती बरतने की कोशिश की, तो नगर निगम के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता त्रिलोकीनाथ कटारे के तेवर बेहद तल्ख नजर आए। उन्होंने बीच सड़क पर पुलिस अधिकारियों को तीखे शब्दों में हिदायत देते हुए कहा कि, “पुलिस कार्यकर्ताओं के साथ संयम बरते, वरना गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे।” कटारे की इस खुली चेतावनी ने प्रशासन के पसीने छुड़ा दिए और पुलिस को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर होना पड़ा।
विधायक शैलेंद्र जैन और महेश जाटव के बीच जुबानी जंग
विधायक शैलेंद्र जैन ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि बैरिकेड्स तोड़ने और अभद्रता करने वाले लोगों पर भाजपा संज्ञान लेगी। दूसरी ओर, महेश जाटव ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा अब हताश हो चुकी है और उन्हें आभास हो गया है कि वे जल्द ही विपक्ष में बैठने वाले हैं। उन्होंने ऐलान किया कि अब कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी और भाजपा व संघ कार्यालय के सामने भी प्रदर्शन किए जाएंगे।
तीन प्रमुख स्थानों पर पुतला दहन और आक्रोश
कांग्रेस ने अपने विरोध को केवल कार्यालय तक सीमित नहीं रखा, बल्कि शहर के तीन प्रमुख स्थानों पर मुख्यमंत्री व नगरीय प्रशासन मंत्री के पुतले फूंके। शहर अध्यक्ष महेश जाटव के नेतृत्व में सबसे पहले कांग्रेस कार्यालय के पास भाजपा की घेराबंदी का मुकाबला करते हुए पुतला दहन किया गया। इसके बाद कार्यकर्ताओं का हुजूम विजय टॉकीज चौराहा पहुँचा, जहाँ सड़क जाम जैसी स्थिति के बीच मुख्यमंत्री व मंत्रियों के पुतले जलाए गए। प्रदर्शन का सिलसिला यहीं नहीं थमा, कांग्रेसियों ने व्यापारिक केंद्र भीतर बाजार में भी जोरदार प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ पुतले फूंककर अपना तीखा आक्रोश दर्ज कराया।
छावनी बना शहर का हृदयस्थल तीनबत्ती
अप्रिय स्थिति को टालने के लिए सीएसपी ललित कश्यप के नेतृत्व में कोतवाली, मोती नगर और सिविल लाइन के थाना प्रभारियों (TIs) ने भारी दलबल के साथ घेराबंदी की। पुलिस को न केवल भाजपाइयों द्वारा फेंके गए जूते-चप्पलों का सामना करना पड़ा, बल्कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के तीखे विरोध और तीन प्रमुख स्थानों पर हुए पुतला दहन के दौरान हुए भारी संघर्ष को भी झेलना पड़ा। अंततः पुलिस ने पूरे कांग्रेस कार्यालय परिसर को बैरिकेडिंग कर छावनी में तब्दील कर दिया।
मैदान में डटे रहे दिग्गज
इस पूरे सियासी घटनाक्रम और पुतला दहन में पूर्व विधायक सुनील जैन, त्रिलोकी नाथ कटारे, रेखा चौधरी, रामकुमार पचौरी, बाबू सिंह यादव, चक्रेश सिंघई, सिंटू कटारे, अक्षत कोठारी, शरद पुरोहित, राकेश छाबड़ा, सुनील पावा सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे। शाम 4 बजे से करीब ढाई घंटे तक चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे ने शहर की कानून व्यवस्था को हिलाकर रख दिया। सागर के इतिहास में यह पहली बार देखा गया जब दो प्रमुख दलों के बीच का विवाद इस कदर ‘सड़क छाप’ संघर्ष में तब्दील हो गया।