पंचतत्व में विलीन हुए समाजसेवी संतोष कुमार मालगुजार, 27 दिनों से ले रहे थे केवल 4 चम्मच पानी, संलेखना पूर्वक त्यागी देह

कटनी। जैन समाज के पूर्व अध्यक्ष, समाजसेवी सवाई सिंघाई संतोष कुमार मालगुजार आज मंगलवार को प्रातः यम संलेखना पूर्वक चेतानोदय तीर्थ क्षेत्र के संत निवास में समाधिस्थ हुए। ज्ञातव्य हो कि वे विगत कई महीनो से अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति के द्वारा नियम संयम जीवन जी रहे थे। लगभग विगत 27 दिनों से केवल चार चम्मच पानी दिन में एक बार लेते थे। उन्हें 10 प्रतिभाधारी उत्कृष्ट साधना में रत छपकराज पूज्य सुदृढ़ सागर जी महाराज, परम पूज्य सनाधिस्थ आचार्य श्री 1008 विद्यासागर जी महाराज, अनेक मुनिराजों एवं आर्यिका माता का आशीर्वाद निरंतर प्राप्त हुआ। उनका डोला संत भवन से प्रारंभ होकर मुक्तिधाम पहुंचा जहां भी पंचतत्व में विलीन हुए। वे लगभग 88 वर्ष के थे। मुखाग्नि उनके ज्येष्ठ पुत्र सुबोध सिंघई ने दी।
यह होती है समाधि की प्रक्रिया
यम सल्लेखना, जिसे संथारा या समाधि-मरण भी कहा जाता है, जैन धर्म में एक धार्मिक अनुष्ठान है जिसमें मृत्यु को निकट जानकर, धीरे-धीरे भोजन और पानी का त्याग करके, आध्यात्मिक वैराग्य के साथ मृत्यु को गले लगाया जाता है। यह आत्महत्या नहीं मानी जाती है, बल्कि कर्मों को क्षीण करने और पुनर्जन्म की प्रक्रिया को प्रभावित करने का एक साधन माना जाता है।








