नॉन टी ई टी शिक्षकों को राहत देने की मांग, आदेश निरस्त करने सीएम से गुहार सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय और एन सी ई टी अधिसूचना का हवाला, डेढ़ लाख शिक्षकों पर असर
Demand for relief for non-TET teachers, appeal to the CM to revoke the order

नॉन टी ई टी शिक्षकों को राहत देने की मांग, आदेश निरस्त करने सीएम से गुहार
सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय और एन सी ई टी अधिसूचना का हवाला, डेढ़ लाख शिक्षकों पर असर
भोपाल यश भारत । प्रदेश में नॉन टी ई टी शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा टी ई टी अनिवार्य किए जाने के खिलाफ शिक्षक संगठनों ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। विभिन्न शिक्षक संघों के पदाधिकारियों ने इस संबंध में ज्ञापन सौंपते हुए हाल ही में जारी आदेशों को निरस्त करने की अपील की है। ज्ञापन में बताया गया कि लोक शिक्षण संचालनालय और जनजातीय कार्य विभाग द्वारा प्रदेश के सभी नॉन टी ई टी शिक्षकों को परीक्षा उत्तीर्ण करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इस पर आपत्ति जताते हुए संगठनों ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने एन सी ई टी की 10 अगस्त 2010 की अधिसूचना के प्रावधानों के अनुसार कुछ श्रेणी के शिक्षकों को टी ई टी से छूट दी गई है। शिक्षक नेताओं का कहना है कि 3 सितंबर 2001 से पूर्व नियुक्त शिक्षाकर्मी एवं संविदा शिक्षक 3 सितंबर 2001 के बाद नियुक्त संविदा शाला शिक्षक तथा वर्ष 2011 से 2014 के बीच गुरूजी से संविदा शिक्षक बने शिक्षकों को TET से छूट का प्रावधान है। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर सभी नॉन टी ई टी शिक्षकों को परीक्षा पास करने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जो अधिसूचना और न्यायालय के निर्णय की भावना के विपरीत है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस निर्णय से प्रदेश के लगभग डेढ़ लाख शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं और उनमें मानसिक तनाव की स्थिति बन रही है। शिक्षक संगठनों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि 2 मार्च 2026 को लोक शिक्षण संचालनालय तथा 26 मार्च 2026 को जनजातीय कार्य विभाग द्वारा जारी आदेशों को तत्काल निरस्त किया जाए और पात्र श्रेणी के शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से मुक्त किया जाए।
ज्ञापन सौंपने वालों में शिक्षक संघों के कई पदाधिकारी शामिल रहे







