नगर निगम में आउटसोर्स घोटाला: कर्मचारियों की संख्या अधिक, निगम की तिजोरी हुई खाली
संचालनालय में गूँज उठा आउटसोर्स कर्मचारियों का मुद्दा, करदाताओं पर बढ़ा दबाव, अधिकारियों में हड़कंप

संचालनालय में गूँज उठा आउटसोर्स कर्मचारियों का मुद्दा, करदाताओं पर बढ़ा दबाव, अधिकारियों में हड़कंप
कटनी, यशभारत। नगर निगम के प्रशासनिक तंत्र में आउटसोर्स कर्मचारियों का मुद्दा अब संचालनालय तक गूँज उठा है। सूत्रों के अनुसार, नगर निगम के कई कर्मचारी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के घरों तथा निजी संस्थानों में कार्यरत हैं, लेकिन उनका वेतन सीधे निगम से जा रहा है, जिससे एक बड़ा वित्तीय घोटाला उजागर हो रहा है।
जांच में मचा था हड़कंप..
पूर्व में तत्कालीन सीईओ और प्रभारी निगमायुक्त शिशिर गेमावत ने मामले की जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद निगम के अधिकारियों में हड़कंप मच गया, क्योंकि अधिकांश कर्मचारी वरिष्ठ अधिकारियों के परिजन—बेटा, बेटी या पत्नी—थे।
कर्मचारियों की संख्या बढ़ी, पदों की संख्या कम
नगर निगम में नियमानुसार केवल 856 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में 1,500 से अधिक कर्मचारी—आउटसोर्स, नियमित, दैनिक और फिक्स—कार्यरत हैं।
वित्तीय स्थिति हुई बदहाल
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, 2014-15 में तत्कालीन आयुक्त एसके सिंह के कार्यकाल में निगम की तिजोरी अरबों रुपये से भरी थी, अब वही तिजोरी खोखली हो चुकी है। इस घोटाले के कारण करदाताओं पर अनावश्यक टैक्स और वसूली का दबाव बढ़ गया है।
नागरिकों में बढ़ी नाराजगी
नागरिकों ने सवाल उठाए हैं कि इस बड़े वित्तीय गड़बड़ी का जवाब कौन देगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द ही सख्त जांच नहीं हुई, तो निगम की प्रतिष्ठा और जनता का भरोसा दोनों ही ध्वस्त हो सकते हैं।
हाइलाइट बॉक्स:
नियमानुसार निगम के 856 पद हैं, 1,500 से अधिक कर्मचारी कार्यरत
कई कर्मचारी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के परिजन शामिल है!
निगम सूत्रों का साफ कहना है इनके बेतन के लिए ही करदाताओं पर बढ़ा अनावश्यक दबाव औऱ टैक्स बढ़ाने जैसी प्रक्रिया निगम की जा रही है। जिससे आम नागरिकों में कर का अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है।






