दद्दाजी के परम भक्त और विद्वान का शाश्वत विलीन


शिव पूजन में निपुण, गुरु-भक्ति और ज्ञान का अनमोल संगम थे “पूरन लाल जी शास्त्री”
कटनी , यशभारत। दद्दा जी दरबार के विश्वसनीय आध्यात्मिक मार्गदर्शक पूरन लाल जी शास्त्री का ब्रह्मलीन होना गुरु-परिवार और अनुयायियों के लिए अपूरणीय क्षति है।
पूरन लाल शास्त्री पूज्य दद्दा जी के परम शिष्य थे और जीवन भर गुरु की सेवा, भक्ति और मार्गदर्शन का पालन करते रहे। वे विद्वान थे और विशेष रूप से शिव पूजन में महारत रखते थे। उनके ज्ञान और भक्तिभाव ने दद्दाजी के अनगिनत महायज्ञों और धार्मिक आयोजनों में उन्हें रीढ़ की हड्डी की तरह मजबूत सहयोगी बनाया।
गुरु-भक्ति और विद्वत्ता के संगम ने उन्हें अनुयायियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना दिया। गुरु के प्रति अटूट निष्ठा और धार्मिक आयोजन में सक्रिय सहभागिता ने उनके व्यक्तित्व को अद्वितीय बना दिया।
अनुयायियों ने कहा कि पूरन लाल शास्त्री जी का जीवन ज्ञान, भक्ति और सेवा का जीवंत उदाहरण था। उनका ब्रह्मलीन होना न केवल एक व्यक्ति का निधन है, बल्कि गुरु-परिवार के लिए शाश्वत आध्यात्मिक क्षति है।







