रीवाl वन्यजीवों की मौत ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। एक वयस्क तेंदुआ गोविंदगढ़ तालाब में मृत अवस्था में पाएगा इसके बाद हड़कंप मच गया। वह पानी में मृत हालत में मिला। ग्रामीणों ने सूचना दी। मौके पर वन विभाग की टीम पहुंची। तेंदुआ का शव पीएम के लिए मुकुंदपुर जू भेजा गया। पीएम के बाद अधिकारियेंा की मौजूदगी में अंतिम संस्कार कर दिया गया है। मामले में तेंदुए की शिकार की आशंका व्यक्त की जा रही है फिलहाल पूरी जांच के बाद ही मामला स्पष्ट हो सकेगा l
वहीं मौत की वजह का पता लगाने बिसरा जांच के लिए जबलपुर और बरेली भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असल वजह का पता चल पाएगा।
तेंदुआ तालाब में नहर के लिए पानी छोडने जाने वाले गेट के पास ही मृत मिला। उसके शरीर पर कहीं भी किसी तरह के जख्म या चोट के निशान नहीं मिले। तेंदुआ पानी में तैर सकता है। उसके तालाब में डूबने की आशंका भी कम है। पीएम में भी पेट में पानी नहीं मिला। ऐसे में मौत की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। जांच रिपोर्ट से ही मौत की वजह पता चलेगी।
मुकुंदपुर चिडियाघर में तेंदुआ का पहले पीएम हुआ। गोविंदगढ़, वेटनरी कॉलेज और चिडियाघर के डॉक्टरों ने मिलकर तेंदुआ का पीएम किया। पीएम के बाद उसका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान सीसीएफ रीवा, डीएफओ, एसडीओ मैहर व अन्य अधिकारी, कर्मचारी मौजूद रहे। उनकी मौजूदगी में ही अंतिम संस्कार किया गया। तेंदुआ का सेम्पल जांच के लिए बरेली और जबलपुर लेबोरेट्री भेजी जाएगी।
आए दिन शिकार की बाते सामने आ रही है। डीएफओ जब से रीवा में पदस्थ हुए है। वन विभाग की सारी एक्टिविटी भी ठप पड़ गई है। डीएफओ का सारा ध्यान कमीशन पर ही रहता है। वह आफिस और बंगले से बाहर निकलते ही नहीं। जबकि इनके प्रोटोकॉल में क्षेत्रों का निरीक्षण, भ्रमण और नाइट हाल्ट भी शामिल हैं। इसी लारवाही ने वन्यजीवों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल डीएफओ पर एक ठेकेदार ने कमीशन का आरोप लगा ही रखा है। ऐसे में इनकी कार्यप्रणाली का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
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