जिला पंचायत के रिश्वतखोरी कांड में आया नया मोड़, बाबू के रूपए लेते पकड़े जाने के बाद सीईओ ने हटाया स्थापना शाखा के प्रभारी ज्ञानेंद्र सिंह को, फॉलोअप : लोकायुक्त ने भी की थी घंटों पूछताछ

कटनी, यशभारत। जिला पंचायत की स्थापना शाखा में लंबे समय से पदस्थ बाबू सत्येन्द्र सोनी के 5 हजार रूपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े जाने का साइड इफेक्ट सामने आया है। लोकायुक्त पुलिस जबलपुर की इस कार्रवाई के तत्काल बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी हरसिमरनप्रीत कौर ने कटनी में कई सालों से कुंडली मारकर जमे पंचायत सेल स्थापना शाखा के प्रभारी ज्ञानेंद्र सिंह को हटाने के आदेश जारी कर दिए। इस शाखा का प्रभार अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी अनुराग मोदी को सौंपा गया है। सीईओ के इस कदम के बाद अब इस पूरे मामले में बाबू सत्येन्द्र सोनी और पंचायत सेल स्थापना शाखा के प्रभारी ज्ञानेंद्र सिंह के बीच सांठगांठ होने की खबरें भी सामने आने लगी है। सूत्रों ने बताया कि ज्ञानेन्द्र सिंह और सत्येन्द्र सोनी पिछले कई सालों से जिला पंचायत में पदस्थ हैं। इनका तबादला भी हुआ तो वे जोड़तोड़ करते हुए वापस कटनी में आकर जम गए। सवाल यही है कि कटनी में आखिर ऐसा क्या है, जो इनका मोह यहां से नहीं छूट रहा। यहां यह बताना भी आवश्यक है कि राज्य सरकार के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा पंचायती राज व्यवस्था के अंतर्गत प्रदेश की सभी जिला पंचायतों को करोड़ों रूपए का बजट प्रतिवर्ष आंवटित किया जाता है। यह राशि जिला पंचायत के माध्यम से ग्राम पंचायतों और जनपद पंचायतों को आवंटित की जाती है। खास बात यह है कि जिले में मध्यान्ह भोजन व्यवस्था का संचालन भी जिला पंचायत के माध्यम से ही होती है। कहीं कटनी से मोह नहीं छूटने का कारण यह तो नहीं और शायद यही वजह है कि इस शाखा के बाबू के रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने के बाद सीईओ ने शाखा के प्रभारी को हटाने में भी देर नहीं की।
लोकायुक्त की कार्रवाई से रिश्वतखोरी का खुलासा
जिला पंचायत कार्यालय में किस तरह योजनाओं और कार्यक्रमों के साथ ही छोटे-छोटे कामों में धन की उगाही की जाती है, इसका जीता जागता मामला उस समय सामने आया, जब यहां स्थापना शाखा में पदस्थ बाबू सत्येन्द्र सोनी रिश्वत लेते हुए पकड़े गए। वर्ष 2023 में रिश्वत लेते हुए पकड़े गए सचिव ने निलंबन से बहाली के लिए प्रयास किए तो बाबू सत्येन्द्र सोनी ने बहाली के एवज में 54 हजार रूपए कीमती मोबाइल फोन की डिमांड कर दी। जिसकी पहली किस्त 5 हजार नगद की रिश्वत लेते बाबू को जबलपुर लोकायुक्त ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया।
चर्चाओं का बाजार गर्म, प्रभारी की भूमिका संदिग्ध
जिला पंचायत की पंचायत सेल स्थापना के बाबू के द्वारा बहाली के नाम पर रिश्वतखोरी किए जाने के मामले में कार्यवाही के बाद चर्चाओं का बाजार सरगर्म है। विभागीय सूत्रों कीं माने तो रिश्वतखोरी के इस मामले में शाखा के प्रभारी ज्ञानेंद्र सिंह की भूमिका भी संदिग्ध हो सकती है। यह भी पता चला है कि ट्रैप कार्यवाही के बाद शाखा प्रभारी ज्ञानेंद्र सिंह से लोकायुक्त की टीम ने घंटों पूछताछ भी की थी। यही वजह है कि उनसे शाखा का प्रभार छीनकर सीईओ ने अन्य अधिकारी को सौंप दिया है। वैसे जिला पंचायत में होने वाली गड़बडय़िों की चर्चाएं आए दिन सामने आती रहती है। कहा जाता है कि यहां पर पदस्थ कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए पैसा ही सब कुछ है। इसके प्रमाण भी बीते दिनों ट्रैप कार्यवाही के दौरान देखने को मिले।







