जिलाध्यक्ष की दौड़ में शामिल नेताओं का भोपाल में डेरा, बड़ा सवाल : क्या रायशुमारी में आने वाले नाम पर पार्टी हाइकमान लगा देगा मुहर ?

कटनी। 25 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खजुराहो दौरे पर आ रहे हैं, इसके बाद भारतीय जनता पार्टी में जिलाध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया तेज हो जाएगी। जिन जिलों में 50 फीसद मंडल अध्यक्ष घोषित हो चुके है, ऐसे जिले जिलाध्यक्ष के चुनाव की पात्रता रखते है। इस लिहाज से कटनी को नया जिलाध्यक्ष मिलना तय है। यहां 26 में 20 यानी 50 प्रतिशत से ज्यादा मंडल अध्यक्ष चुने जा चुके है। 25 से 30 दिसंबर के बीच रायशुमारी हो जाएगी। साल के आखिरी तक नए मुखिया की घोषणा होना है, लिहाजा अपनी अपनी सेटिंग बिठाने कुछ दावेदार तो एक सप्ताह से भोपाल में डेरा डाले हुए है, जबकि कुछ वरिष्ठ नेताओं से मेल मुलाकात के बाद कटनी लौट चुके हैं।
मौजूदा समीकरणों पर गौर करें तो दीपक सोनी टंडन की वापसी आसान दिख रही है, बावजूद इसके भाजपा की सियासत में किसी भी बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। जिलाध्यक्ष की दौड़ में शामिल करीब आधा दर्जन दावेदार यही मान रहे है कि नेतृत्व में बदलाव होगा। पार्टी में सबकुछ सहमति और समन्वय के आधार पर तय किए जाने की बात की जाती है और इसे ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया का नाम दे दिया जाता है, किंतु इस बार जिलाध्यक्ष के दावेदारों की संख्या अधिक होने की वजह से चुनाव होना निश्चित है, भले ही उसका रूप रायशुमारी हो। सूत्र बताते हैं कि रायशुमारी की सारी प्रक्रिया को जिला चुनाव अधिकारी हरिशंकर खटीक पूरी करेंगें। वे ही सहायक निर्वाचन अधिकारियों श्रीमती अलका जैन और सुरेश सोनी के साथ मिलकर रायशुमारी करेंगे। पर्यवेक्षक के तौर पर पार्टी बाहर से किसी और नेता को भी भेज सकती है। सवाल इसका है कि रायशुमारी में अपनी राय देने का मौका किसे मिलेगा। मतलब यह कि किन लोगों को इसका पात्र माना जाएगा। यदि मौजूदा जिला पदाधिकारी और मंडल अध्यक्षों के अलावा वर्तमान संगठन में किसी न किसी रूप में जुड़े चुनिंदा लोगों ही अवसर दिया गया तो रायशुमारी के नतीजे बहुत ज्यादा बदलने वाले नहीं। इससे हटकर यदि अन्य नेताओं को भी अपनी राय रखने का मौका मिला तो जरूर कुछ चौंकाने वाले सुझाव आ सकते है। वैसे रायशुमारी में किसी नेता के पक्ष में ज्यादा लोग जाएं, किंतु प्रदेश हाइकमान जिसे चाहेगा, घोषणा उसी नाम की होगी, इसीलिए अनेक दावेदार कटनी में होने वाली रायशुमारी पर बहुत ज्यादा भरोसा करने के बजाय भोपाल जाकर नेताओं से खुदके लिए लॉबिंग करने में जुटे है। एक सप्ताह से कुछ दावेदार राजधानी में बड़े नेताओं का आशीर्वाद ले रहे हैं तो कुछ अपना मामला जमाकर वापस लौट चुके है। जिलाध्यक्ष के चुनाव में जिले के विधायकों की राय भी अहम होने जा रही है, इसलिए दावेदार इन दिनों विधायकों को भी सिद्ध करने में लगे हैं। पुराने शिकवे मिटाए जा रहे है।








