गरीब महिलाओं की मेहनत की कमाई हड़पी, शक्ति महिला संघ बहुउद्देशीय सहकारी समिति पर लगे गंभीर आरोप, रोज जमा होते थे 100 रूपए, अब ऑफिस में ताला लगाकर फरार हो गए एजेंट, बड़वारा पुलिस ने नहीं की कार्रवाई

कटनी, यशभारत। बड़वारा तहसील के अंतर्गत ग्राम विलायतकला में फर्जी बचत योजना के जरिए सैकड़ों गरीब मजदूर महिलाओं की मेहनत की कमाई हड़पने का मामला सामने आया है। शक्ति महिला संघ बहुउद्देशीय सहकारी समिति मर्यादित सकरी क्षेत्र से संबद्ध नामक संस्था ने दैनिक जमा योजना के नाम पर प्रतिदिन 100 रूपए जमा कराने का लालच गरीब मजदूर महिलाओं को दिया। महिलाओं ने पासबुक जारी कराईं और कई सालों तक इसमे रूपए जमा किए लेकिन पैसे वापसी के समय कंपनी के ऑफिस में ताला लगा मिला और एजेंट फरार हो गए। पीडि़तों का कहा है कि उनके द्वारा जमा की गई राशि लाखों रुपये में है। शिकायत में कहा गया है कि गांव की अधिकांश महिलाएं दिहाड़ी मजदूरी, सब्जी बेचकर परिवार चलाती हैं और स्व-सहायता समूहों से जुड़ी हैं। कंपनी के एजेंटों ने मीठी बातों में फंसाकर ब्याज सहित मोटी रकम लौटाने का वादा किया। पीड़ित सुशीला चौधरी ने बताया कि हमने बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्च के लिए सालों जमा किया। पासबुक में सब दर्ज है, लेकिन अब ऑफिस बंद हो गया है। जिससे उनकी मेहनत की कमाई डूब गई है। एजेंट जितेंद्र श्रीवास्तव समेत अन्य गायब हैं। एक अन्य पीडि़त रोशनी गुप्ता को 37 हजार 620 का स्टेट बैंक ऑफ इंडिया चंदिया शाखा से जारी चेक मिला, जो फंड्स इनसफिशिएंट के कारण बाउंस हो गया। कंपनी का नाम कुछ जगहों पर सन धरती मानवला टेक्निकल एंड डेवलपमेंट सर्विसेज भी बताया जा रहा है।
महिलाओं ने किया प्रदर्शन
पीडि़त महिलाओं ने पासबुक हाथ में लेकर विरोध प्रदर्शन किया। पीडि़तों का आरोप है कि उनके साथ हुए फर्जीबाड़े की शिकायत उन्होंने बड़वारा थाने पहुंचकर पुलिस से भी की लेकिन पुलिस ने शिकायत दर्ज करने की बजाए यह आश्वासन दिया कि पैसे वापस मिल जाएंगे लेकिन महीनों बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। महिलाओं ने बताया कि मैनेजर ने धमकी दी है कि जहां शिकायत करनी है कर लो, हम मामला दबा देंगे।
पुलिस प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
यह घटना महंगाई के दौर में गरीबों पर दोहरा प्रहार है। पीडि़तों ने स्थानीय विधायक से भी गुहार लगाई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। क्षेत्रवासियों का कहना है कि ऐसी कंपनियां राजनीतिक संरक्षण में चलती हैं। जिले में पिछले कई वर्षों में कई चिट फंड घोटाले हो चुके हैं लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। विशेषज्ञों के अनुसार ग्रामीण इलाकों में फर्जी बचत योजनाएं आम हैं। जो गरीबों को निशाना बनाती हैं। एसईबीआई और आरबीआई दिशानिर्देशों के बावजूद बिना रजिस्ट्रेशन वाली संस्थाएं सक्रिय हैं। पीडि़त महिलाओं की मांग है कि कंपनी मालिक और एजेंटों की तत्काल गिरफ्तारी की जाए और पीडि़तों को जमा राशि ब्याज सहित वापस दिलाई जाए।






