मध्य प्रदेशराज्य

क्रिकेट मैदान बना कन्यादान का साक्षी :‘विवाह कप’ टूर्नामेंट के फाइनल में दो बेटियों का हुआ विवाह

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दमोहl जिले के कुम्हारी गांव में आयोजित ‘विवाह कप’ क्रिकेट टूर्नामेंट एक बार फिर सामाजिक सरोकार की मिसाल बना। टूर्नामेंट के फाइनल मुकाबले के दिन क्रिकेट मैदान पर चौके-छक्कों की गूंज के बीच दो गरीब बेटियों का विवाह धूमधाम से संपन्न कराया गया। इस अनोखी और प्रेरणादायी पहल के आयोजक रवि चौहान हैं।

इस अवसर पर पूर्व वित्त मंत्री एवं दमोह विधायक जयंत मलैया, हटा विधायक उमा देवी खटीक और कलेक्टर सुधीर कुमार सहित अनेक जनप्रतिनिधि व प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। हजारों की संख्या में पहुंचे दर्शकों ने क्रिकेट मैच का आनंद लेने के साथ-साथ विवाह की रस्मों के भी साक्षी बने और आयोजक की खुले दिल से सराहना की।

पहली बेटी के जन्म पर लिया था संकल्प

कुम्हारी निवासी रवि चौहान ने अपनी पहली बेटी के जन्म पर हर साल एक गरीब बेटी का विवाह कराने का संकल्प लिया था। दूसरी बेटी के जन्म के बाद उन्होंने इस संकल्प को व्यापक रूप देते हुए ‘विवाह कप’ क्रिकेट टूर्नामेंट की शुरुआत की। यह लगातार तीसरा वर्ष है जब इस टूर्नामेंट के माध्यम से दो बेटियों का विवाह संपन्न कराया गया।

इस वर्ष जिन बेटियों का विवाह कराया गया, उनमें एक आदिवासी समाज की शिवानी, जिनके माता-पिता नहीं हैं, और दूसरी दलित समाज की ज्ञानबाई अहिरवार, जिनकी मां का देहांत हो चुका है, शामिल हैं। आयोजन ने सामाजिक समरसता और मानवीय संवेदनाओं का अनूठा उदाहरण पेश किया।

मैदान में बारात का भव्य स्वागत

क्रिकेट मैच के दौरान जैसे ही बारात मैदान में प्रवेश हुई, दर्शकों ने तालियों और उत्साह के साथ स्वागत किया। मैदान को ही विवाह स्थल में परिवर्तित कर वैदिक रीति-रिवाजों से दोनों बेटियों का विवाह कराया गया।

शिवानी आदिवासी का विवाह पैरवारा निवासी प्रहलाद आदिवासी के साथ संपन्न हुआ। माता-पिता न होने के कारण रवि चौहान ने स्वयं पिता की भूमिका निभाते हुए सभी रस्में पूरी कीं। वहीं ज्ञानबाई अहिरवार का विवाह करैया गांव से आए प्रकाश अहिरवार के साथ हुआ।

गृहस्थी का पूरा सामान भेंट

दहेज प्रथा से दूर रहते हुए, कन्यादान के रूप में दोनों बेटियों को सोफा, अलमारी, बेड, कूलर सहित अन्य आवश्यक घरेलू सामग्री भेंट की गई, ताकि वे सम्मानपूर्वक अपने नए जीवन की शुरुआत कर सकें।

‘विवाह कप’ क्रिकेट टूर्नामेंट आज केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा बन चुका है, जहां खेल, सेवा और संवेदना एक साथ नजर आती है।

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