सागर यश भारत (संभागीय ब्यूरो)/ खून के रिश्तों को शर्मसार करने वाले एक कलयुगी पुत्र को माननीय न्यायालय ने पिता की हत्या के जुर्म में उम्रकैद की सजा सुनाई है। रहली थाना क्षेत्र के बादीपुरा में घटित इस जघन्य हत्याकांड में पुलिस की मजबूत विवेचना और अभियोजन की प्रभावी पैरवी ने आरोपी को उसके किए की अंतिम परिणति तक पहुँचाया। न्यायालय ने आरोपी नरेश कुर्मी को आजीवन कारावास के साथ ही अर्थदंड से दंडित करने का आदेश जारी किया है।
यह सनसनीखेज वारदात 11 अप्रैल 2025 की रात को हुई थी। आरोपी नरेश कुर्मी अपने पिता विष्णु कुर्मी के साथ खेत पर जा रहा था। रास्ते में हुए आपसी विवाद ने ऐसा हिंसक रूप लिया कि नरेश ने मर्यादा की सारी हदें पार कर दीं। उसने अपने ही पिता पर कुल्हाड़ी से ताबड़तोड़ प्रहार कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया। इस घटना ने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया था। आरोपी की पत्नी भारती की रिपोर्ट पर रहली पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर कातिल बेटे को गिरफ्तार किया था।
घटना की विवेचना में रहली थाना प्रभारी सुनील शर्मा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए हर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाया। विवेचना के दौरान गवाहों की सुरक्षा और उनकी समय पर न्यायालय में उपस्थिति सुनिश्चित की गई। पुलिस द्वारा पेश किए गए पुख्ता सबूतों और दस्तावेजों ने आरोपी के खिलाफ मामले को पत्थर की लकीर बना दिया, जिससे न्यायालय में उसका बचना नामुमकिन हो गया।
अभियोजन की प्रभावी पैरवी : न्याय की जीत
न्यायालयीन कार्यवाही के दौरान अभियोजन अधिकारी श्री सौरभ डिम्हा ने मामले को बेहद आक्रामक और तार्किक ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने दलील दी कि अपने ही पिता की हत्या करना समाज के खिलाफ एक जघन्य अपराध है। माननीय न्यायालय ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर नरेश कुर्मी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 1000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। रहली पुलिस की इस सफलता ने अपराधियों में खौफ और आम जनता में न्याय के प्रति विश्वास को और सुदृढ़ किया है।
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