मध्य प्रदेशराज्य

अमानक गेहूं सप्लाई : 3 अधिकारियों पर FIR ,22 उचित मूल्य दुकानों में भेजा गया था खराब गेहूं

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मंडला l मोहगांव और घुघरी विकासखंड की 22 उचित मूल्य दुकानों में नवंबर में 984 क्विंटल अमानक गेहूं की सप्लाई के मामले में तीन अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इन अधिकारियों में मध्य प्रदेश वेयर हाउसिंग एवं लॉजिस्टिक कॉर्पोरेशन के जिला प्रबंधक (जो नागरिक आपूर्ति निगम के प्रभारी जिला प्रबंधक भी हैं), नागरिक आपूर्ति निगम के केंद्र प्रभारी (घुघरी) और वेयरहाउस घुघरी के शाखा प्रबंधक शामिल हैं। यह मामला आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत दर्ज किया गया है।

उचित मूल्य दुकान के विक्रेता ने की थी शिकायत

घुघरी के कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी ने बताया कि परसवाह की उचित मूल्य दुकान के विक्रेता ने खराब गेहूं मिलने की शिकायत की थी। इस शिकायत के बाद तहसीलदार और कार्यपालिक तहसीलदार के साथ एक संयुक्त टीम बनाकर जांच की गई। जांच में गेहूं अमानक पाया गया, जिसके बाद एसडीएम घुघरी को एक प्रतिवेदन सौंपा गया। इसी प्रतिवेदन के आधार पर घुघरी थाने में एफआईआर दर्ज की गई है।

984 क्विंटल अमानक गेहूं दुकानों तक पहुंचा

पुलिस के अनुसार, नवंबर में पीडीएस के तहत राशन वितरण के लिए जामगांव नैनपुर के आकाश वेयरहाउस से गंगा वेयरहाउस घुघरी को गेहूं भेजा गया था। यह गेहूं मोहगांव और घुघरी विकासखंड की 22 उचित मूल्य दुकानों के लिए था। कुल 984 क्विंटल अमानक गेहूं (मानव उपभोग के अयोग्य) इन दुकानों तक पहुंचा। उचित मूल्य दुकानों से आपूर्ति विभाग और प्रशासन को अमानक गेहूं की शिकायतें मिली थीं, जिसके बाद जांच शुरू की गई।

पुलिस ने तीन अधिकारियों पर दर्ज किया मामला

एसडीएम घुघरी और कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी के प्रतिवेदन के आधार पर, घुघरी पुलिस ने तीन अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इनमें नागरिक आपूर्ति निगम के प्रभारी जिला प्रबंधक हेमंत वर्मा, नागरिक आपूर्ति निगम के केंद्र प्रभारी अमन तेकाम और वेयरहाउस घुघरी के शाखा प्रबंधक दुर्गेश तेकाम शामिल हैं। इन पर पीडीएस कंट्रोल ऑर्डर की कंडिकाओं के तहत आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के अंतर्गत कार्रवाई की गई है। एसपी रजत सकलेचा ने बताया कि परसवाह की उचित मूल्य दुकान से घुन लगा गेहूं बेचने के लिए भेजा गया था। राजस्व अधिकारियों की जांच में यह भी सामने आया है कि संबंधित फर्म को पहले ही ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था। इसके बावजूद अधिकारियों द्वारा नॉन-एफएक्यू (मानक के अनुरूप नहीं) गेहूं की सप्लाई की गई। अधिकारियों के जांच प्रतिवेदन के आधार पर यह मामला दर्ज किया गया है।

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