सागर यश भारत (संभागीय ब्यूरो)/ सागर नगर निगम की लापरवाही और बदइंतजामी का एक ऐसा नमूना सामने आया है, जिसने निगम की बिलिंग व्यवस्था की विश्वसनीयता पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। ‘विचार समिति’ के अध्यक्ष कपिल मलैया ने निगम प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया है कि नगर निगम बिना किसी भौतिक सत्यापन के कागजी घोड़े दौड़ा रहा है और आम जनता के साथ-साथ प्रतिष्ठित नागरिकों को भी फर्जी बिलों के जाल में उलझाकर उनकी छवि धूमिल कर रहा है।
कनेक्शन कटा 5 साल पहले, बिल आया पौने दो लाख
पूरा मामला जलकर की वसूली से जुड़ा है। कपिल मलैया ने खुलासा किया कि नगर निगम ने उनके नाम पर दो जल कनेक्शनों का लगभग 1.74 लाख रुपये का बकाया निकाल दिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि वर्तमान में उनका कोई जल कनेक्शन अस्तित्व में ही नहीं है। श्री मलैया ने बताया कि उनके जो भी पुराने कनेक्शन थे, उन्हें वर्ष 2019 में ही विधिवत विच्छेद (Disconnect) कराया जा चुका है, जिसकी आधिकारिक रसीद और दस्तावेज उनके पास सुरक्षित हैं। इसके बावजूद नगर निगम ने बिना जांच-पड़ताल किए उनका नाम बकायादारों की सूची में डाल दिया, जिसे उन्होंने अपनी छवि खराब करने की सोची-समझी साजिश करार दिया है।
कचरा कलेक्शन में भी ‘मुगलिया’ वसूली का आरोप
जलकर के अलावा कचरा कलेक्शन बिलिंग को लेकर भी कपिल मलैया ने नगर निगम को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि निगम की कार्यप्रणाली बेहद मनमानी है; पहले 7 वर्षों का एकमुश्त बिल थोपा गया और अब एक साथ 2 वर्षों का बिल थमा दिया गया है। मलैया ने बताया कि उन्होंने कई बार लिखित रूप से मांग की है कि कचरा कलेक्शन का बिल प्रतिमाह नियमित रूप से दिया जाए ताकि भुगतान में पारदर्शिता रहे, लेकिन निगम के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक भारी-भरकम बिल भेजकर निगम अपनी वित्तीय खामियों का बोझ जनता पर डाल रहा है।
लापरवाही का आलम: सत्यापन गायब, वसूली पर जोर
कपिल मलैया ने सीधे शब्दों में कहा कि नगर निगम का राजस्व विभाग पूरी तरह से पंगु हो चुका है। बिल जारी करने से पहले डेटा का सत्यापन नहीं किया जा रहा है, जिससे न केवल आर्थिक विसंगतियां पैदा हो रही हैं, बल्कि शहर के नागरिकों को अनावश्यक मानसिक प्रताड़ना और बदनामी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब 2019 में कनेक्शन विच्छेद की रसीद कट चुकी है, तो 2026 में बकाया की सूची में नाम कैसे आया?
नगर निगम सागर की इस लापरवाही ने यह साबित कर दिया है कि सॉफ्टवेयर और स्मार्ट सिटी के दौर में भी बिलिंग रजिस्टर ‘राम भरोसे’ चल रहे हैं। यदि एक जागरूक नागरिक के साथ ऐसा फर्जीवाड़ा हो सकता है, तो आम जनता की क्या बिसात? अब देखना यह होगा कि इस खुलासे के बाद नगर निगम के आला अधिकारी अपनी गलती सुधारते हैं या फिर ‘वसूली’ के इसी अंधर-तंत्र को जारी रखते हैं।
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