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हाथियों की होगी खातिरदारी और खुशामदी : कान्हा में 31 अगस्त से शुरू होगा हाथियों का रिजुविनेश कैंप

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मंडला lकान्हा राष्ट्रीय उद्यान में विगत 16 वर्षो से हाथी रेजुविनेश कैम्प का आयोजन किया जा रहा है, जो एक अभिनव प्रयास है। यह रेजुविनेश कैम्प हाथियों के शरीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। कान्हा के हाथियों की खुशामदी के लिए प्रतिवर्ष हाथी रिजुविनेशन कैम्प का आयोजन किया जाता है। साल भर में कुछ ही दिन कान्हा के हाथियों के लिए सबसे मौज मस्ती और पूरे शाही अंदाज से गुजरते हैं।

इस वर्ष 31 से 06 सितंबर तक हाथियों के लिए यह दिन रहेंगे। कान्हा के 17 हाथियों के लिए रिजुविनेशन कैंप का आयोजन किया जा रहा है। इसमें हाथियों की पूरी खातिरदारी होगी और उनके स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जाएगा। कैंप को लेकर तैयारियां हो चुकी है। सात दिनों की खातिरदारी के बाद कान्हा के 17 विभागीय हाथी कान्हा पार्क की सुरक्षा में पूरे जोश के साथ तैनात हो जाएंगे। जानकारी के अनुसार इस कैंप में पार्क के 17 हाथियों में से 15 हाथी शामिल होंगे। जिसमें 10 नर एवं 05 मादा हाथी है। रेजुविनेशन कैम्प में सभी हाथियों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। कान्हा के सभी विभागीय हाथियों को पार्क की सुरक्षा व्यवस्था और अन्य कामों के लिए उपयोग में लाया जाता है। हाथियों को कैंप में मक्के और बाजरे की रोटियां, नारियल, केला, गन्ना समेत तमाम चीजें खिलाई जाएंगी जो उनकी पंसद है। बताया गया कि कान्हा टाइगर रिजर्व में 17 विभागीय हाथी में एक नवजात बच्चा भी है। सबसे बुजुर्ग मादा हाथी वनदेवी है, जिसका जन्म 12 फरवरी 1941 को हुआ था और सबसे नया सदस्य 3 जुलाई 2025 को जन्मा नवजात हाथी है, जिसकी माँ निर्मला है । सुरक्षा कारणों से नवजात बच्चे और उसकी माँ निर्मला को इस कैंप से अलग रखा जाएगा जिससे वे हर्पीस जैसे संक्रामक रोगों से बचे रहें।

स्वास्थ्य को लेकर होगी देखभाल

इस रिजुविनेशन कैंप के दौरान हाथियों के रक्त के नमूने भी जांच हेतु लिए जाएंगे। इसके साथ ही हाथियों के नाखूनों की ट्रिमिंग, दवा द्वारा पेट के कृमियों की सफाई और हाथी दांत की आवश्यकतानुसार कटाई की जाएगी। वहीं इनकी कैंप के दौरान सात दिनों तक रोजाना तेल से मालिश भी की जाएगी।

हाथियों के लिए मीनू तैयार

कान्हा के हाथियों को उनके मनपसंद भोजन देने के लिए मीनू तैयार किया गया है। हर दिन कैम्प में हाथियों को मीनू के हिसाब से अलग-अलग डाइट रहेगी। इसमें उन्हें सुबह से लेकर शाम तक क्या-क्या किया जाना है और क्या खिलाना है इसका चाट तैयार है। इसमें डॉक्टरों की टीम तैनात रहेगी और यह काम महावत के माध्यम से किया जाएगा। प्रति हाथियों को स्वादिष्ट व्यंजनों में केला, नारियल, गेहूं का आटा, सोयाबीन का आटा, चना का बेसन, गुड़, नमक, गन्ना, अनानास, आम, पपीता, नाशपाती, मक्का समेत मौसमी फल खिलाए जाएंगे।

कान्हा पार्क में है 17 विभागीय हाथी

कान्हा नेशनल पार्क में फिलहाल 17 विभागीय हाथी है। इनमें से कुछ हाथियों को देश के विभिन्न हाथी मेलों से क्रय करके कान्हा लाया गया है और कुछ हाथियों की पैदाईश कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में ही हुई है। इन 17 विभागीय हाथियों में 06 मादा हाथी, 10 नर हाथी और एक हाथी का मादा बच्चा शामिल है। जिसमें वनमाला, राणा प्रताप, शिवा, चंंचलकली, लाल बहादुर, निर्मला, पवनपुत्र, हिमालय, वनदेवी, शिवानी, वनराज, मानसी, कान्हा (जंगली), रवि, शिवा-2, जंगली हाथी कान्हा और एक नवजात निर्मला हाथी का मादा बच्चा पार्क में है। इनमें सबसे उम्रदराज वनदेवी, चंचलकली, वनमाला मादा हाथी और लाल बहादुर नर हाथी है।

अधिकारियों की जिम्मेदारी तय

कैंप का समापन 5 सितंबर को होगा, जिसमें खेल गतिविधियों से संबंधित पुरस्कार वितरण और हाथियों व महावतों की समीक्षा की जाएगी। 6 सितंबर को सभी हाथी अपने निर्धारित कैंपों में वापस लौट जाएंगे। यह कैंप कान्हा टाइगर रिजर्व द्वारा वन्यजीव प्रबंधन में किए जा रहे प्रयासों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस कैंप में कान्हा प्रबंधन के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिसमें 31 अगस्त को सहायक संचालक (हलोन) और परिक्षेत्र अधिकारी मुक्की, 01 सितंबर को सहायक संचालक फेन, हालोन और परिक्षेत्र अधिकारी भैसानघाट, गढ़ी, 02 सितंबर वन्यप्राणी चिकित्सा अधिकारी, सहायक संचालक बंजर और परिक्षेत्र अधिकारी सरही, सिझौरा, 3 सितंबर को वन्यप्राणी चिकित्सा अधिकारी, सहायक संचालक मलांजखंड और परिक्षेत्र अधिकारी सूपखार, खापा, 4 सितंबर सहायक संचालक सिझौरा, परिक्षेत्र अधिकारी कान्हा, मुक्की और डॉ. आरके चतुर्वेदी को जिम्मेदारी सौंपी है। 4 सितंबर को ही डॉ. आरके चतुर्वेदी द्वारा सभी महावत और चाराकटरों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा।

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