जबलपुरमध्य प्रदेशराज्य

हनुमानताल तट पर 1745 का प्राचीन गणेश मंदिर

जबलपुर यश भारत। संस्कारधानी के मध्य में स्थित हनुमानताल सरोवर किसी पहचान का मोहताज नहीं है। शहर का यह एकमात्र ऐसा तालाब है जहां साल भर तक सांस्कृतिक और परंपराओं के नजारे दिखते है। अपनी ऐतिहासिक महत्व के कारण भी यह तालाब अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। वैसे तो चारों तरफ अनेक मंदिर और धार्मिक स्थल है लेकिन इन्हीं मंदिरों में से एक है प्राचीन गणेश मंदिर जिसका निर्माण वर्ष 1745 में हुआ था और आज भी यह मंदिर क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। वर्तमान में गणेश मंदिर के पुजारी पंडित राजेश उपाध्याय ने जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें अपने पूर्वजों की माध्यम से यह जानकारी लगी है कि इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1745 में किया गया था। मंदिर में भगवान गणेश का जो विग्रह आज मौजूद है वह निर्माण के समय का ही है। जिस मंदिर में भगवान गजानन विराजमान है उसकी बनावट ही बताती है कि यह काफी पुराना और प्राचीन मंदिर है। मंदिर के गर्भगृह में ही भगवान शिव लक्ष्मी नारायण सूर्य देवता नदी और हनुमान जी के भी विगृह स्थापित है जो इस मंदिर को अलग पहचान देते हैं।

पठकान अम्मा के पूर्वजों ने कराया था मंदिर का निर्माण

जैसा की मंदिर के पुजारी पंडित राजेश उपाध्याय बताते हैं कि जब वह बालकाल में थे उस समय मंदिर के पास एक पठकान अम्मा रहा करती थी और उन्हीं के पूर्वजों के द्वारा इस मंदिर का निर्माण कराया गया था। पाठक अम्मा की कोई संतान नहीं थी और जब तक वह जीवित रहीं तब तक इस मंदिर की देखभाल करती रही। वर्तमान पुजारी की तीन पीढ़ियां इस मंदिर की सेवा से जुड़ी रही हैं। पठकान अम्मा ने अपने जीवनकाल मैं ही इस मंदिर को अयोध्या के किसी मंदिर को दान कर दिया था। जिसके बाद अयोध्या से कुछ लोग आये थे और उन्होंने मंदिर की देखरेख का जिम्मा हनुमान जी के अनन्य भक्त गया प्रसाद पाठक को सौंप दिया था तब से लेकर आज तक उन्हीं के वंशजों के द्वारा इस मंदिर की देखरेख की जा रही है।

जिस मंदिर के नाम पर हनुमानताल तालाब का नाम पड़ा वह सामने स्थित है

गणेश जी के इस प्राचीन मंदिर के सामने प्राचीन हनुमान मंदिर स्थित है गणेश मंदिर के पुजारी और क्षेत्रीय लोगों के अनुसार हनुमान जी के इसी मंदिर के कारण तालाब का नामकरण हनुमानताल तालाब के रूप में किया गया। आज की तारीख में तो तालाब के चारों तरफ छोटे बड़े करीब दो दर्जन से ज्यादा मंदिर है और इन मंदिरों में अनेक देवी देवताओं की प्रतिमाएं भी विराजित है लेकिन गणेश जी और हनुमान जी के यह प्राचीन मंदिर सबसे पुराने है। पुजारी जी ने यह भी बताया कि शहर में दो स्थान ही ऐसे थे जहां गणेश जी और हनुमान जी के मंदिर आमने-सामने स्थित है हनुमान ताल के अलावा ऐसा ही एक उदाहरण गौरीघाट रोड में भी है।

मंदिर के मूल स्वरूप में थोड़े बदलाव किए गए हैं

मंदिर के पुजारी के अनुसार निर्माणकाल के बाद आवश्यकता अनुसार छोटे-मोटे बदलाव तो किए गए हैं लेकिन मंदिर का वास्तविक स्वरूप और गर्भ ग्रह में स्थापित प्रतिमा प्राचीनकाल की है।
और भी प्राचीन मंदिर है सरोवर तट पर

यदि हनुमानताल तालाब के चारों तरफ बनी धार्मिक स्थलों की बात की जाए तो यहां पर गोपाललाल जी के मंदिर के अलावा बड़ा जैन मंदिर और दूसरे अनेक प्राचीन मंदिर भी है लेकिन शायद इन सभी मंदिरों से प्राचीन मंदिर यही गणेश और हनुमान मंदिर है। हालांकि पंडित उपाध्याय ने यह भी बताया कि प्रचार प्रसार के अभाव में शायद लोगों को इस मंदिर की प्राचीनता और महत्व के संबंध में जानकारी न होने के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु तो नहीं आते लेकिन जो लोग पीढियों से हनुमान ताल क्षेत्र में रहते है वह इसके ऐतिहासिक महत्व को समझते हैं और मंदिर में दर्शनों के लिए आते भी है।

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