सतना। सिंहपुर थाना पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। दीवार बनाने को लेकर हुए विवाद में हत्या के आरोप में जेल में बंद तीन आरोपी अदालत से जमानत पर रिहा हो गए। इसका कारण यह रहा कि पुलिस ने निर्धारित 90 दिन की समयसीमा में चालान अदालत में पेश नहीं किया।
कौन-कौन हुए रिहा
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी नागौद वैभव पटेल की अदालत ने गुरुवार को आरोपी लालमन कुशवाहा, मोहनलाल कुशवाहा और रामशरण कुशवाहा को जमानत देने का आदेश दिया। सभी को 25-25 हजार रुपये की जमानत राशि और बॉन्ड भरने की शर्त पर रिहा किया गया।
अदालत ने यह भी शर्त लगाई कि आरोपी हर पेशी पर मौजूद रहेंगे, गवाहों को प्रभावित नहीं करेंगे और मामले में कोई बाधा नहीं डालेंगे।
डिफॉल्ट बेल का अधिकार
24 सितंबर को आरोपियों की ओर से डिफॉल्ट बेल की अर्जी लगाई गई थी, लेकिन उस समय 90 दिन पूरे न होने पर कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया था। इसके बावजूद पुलिस चालान पेश करने में नाकाम रही। जब 90 दिन पूरे हो गए, तो दोबारा बेल आवेदन लगाया गया।
पुलिस ने देर से चालान पेश करते हुए जमानत का विरोध किया, लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया कि अभियोग पत्र समय पर नहीं दिया गया है, ऐसे में आरोपियों को विधि अनुसार डिफॉल्ट बेल का अधिकार है।
क्या है मामला
यह विवाद जमीन बंटवारे के बाद दीवार बनाने को लेकर शुरू हुआ था। आरोप है कि झगड़े के दौरान तीनों आरोपियों ने जयराम कुशवाहा की पिटाई की थी। गंभीर रूप से घायल जयराम ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। पुलिस ने 26 जून को आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
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