
यशभारत ,मुंबई संस्करण 100 दिन पूरे
किसी भी अखबारी संस्थान के लिए उसका हर कदम महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि वह हजारों- लाखों पाठकों का एक परिवार निर्मित करता है। 2007 को संस्कारधानी जबलपुर से यशभारत के रूप में जिस बिरवा को रोपा गया, उसने 19 बरस में वटवृक्ष का रूप ले लिया। यह सफर मध्यप्रदेश की सीमाओं से आगे निकलकर देश की व्यावसायिक राजधानी मुंबई पहुंचा। यशभारत को मुंबई का परिवारी बने आज 100 दिन पूरे हुए। आजादी के पहले से जागा यह महानगर केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनियां का ध्यान अपनी ओर खींचता है। मायानगरी में यशभारत का बीजारोपण जिन प्रतिबद्ध साथियों की मेहनत, लगन और समर्पण से हुआ, वे बधाई के पात्र हैं। वे सभी पाठक भी इस यात्रा में अभिनंदनीय हैं, जो यशभारत के पन्नों में अपनी खुशियों की तस्वीर ढूंढते हैं। यशभारत को निकालने वाले ज्यादातर साथी प्रतिबद्ध पत्रकारिता की उपज हैं। उनमें व्यवस्था को बदलने का संकल्प है। हमारा वादा है कि यशभारत आने वाले समय में मुंबई की धड़कनों को महसूस करते हुए लोगों की सोच का आईना बनेगा। स्वाभाविक है एक अखबार से जनमानस को अनगिनत उम्मीदें होती हैं, क्योंकि अखबार ही सरकार और जनप्रतिनिधियों के बीच सेतु का काम करता है। हम मानते हैं किसी भी समाचार पत्र की सफलता के लिए 2400 घंटों का यह समय बेहद कम है। अभी तो सफर लम्बा है। चुनौतियों का तो जैसे कोई हिसाब ही नहीं। जबलपुर, कटनी, भोपाल, नरसिंहपुर, मंडला और मुंबई संस्करणों के पड़ाव के बाद दुबई में डिजिटल एडिशन की ओर भी कदम बढ़ चुके हैं। कोई भी कामयाबी आत्ममुग्धता का भाव पैदा कर देती है, लेकिन यशभारत प्रबंधन इससे दूर है। संस्थान की खासियत यही है कि इसके संस्थापक आशीष शुक्ला एक हॉकर से भी सीधा रिश्ता रखते हैं। आप सभी को मुंबई संस्करण के प्रकाशन का शतक पूरा होने की बधाई। यशभारत अखबार और इसके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वेबसाइट, फेसबुक, इंस्टाग्राम, यशभारत एप और टीवी आदि से जुड़े रहकर आप सब रोज बढ़ रहे यशभारत समूह का हिस्सा बने रहें, इन्हीं मंगलकामनाओं के साथ…
सिद्धि विनायक के श्री चरणों में नमन…
-प्रवीण अग्रहरि







