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धनतेरस क्यों मनाया जाता है, जानें इसके पीछे की वजह

धनतेरस पौराणिक कथा

धनतेरस क्यों मनाया जाता है, जानें इसके पीछे की वजह

हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा करने का विशेष महत्व होता है, जिन्हें आरोग्य का देवता भी कहा जाता है। वहीं, धनतेरस पर खरीदारी करने का विधान भी बताया गया है। शास्त्रों में बताया गया है कि इसी तिथि पर समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे। धनतेरस के दिन से ही दिवाली की शुरुआत हो जाती है और इस दिन खरीदारी करने से कई गुना फल प्राप्त होता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर धनतेरस क्यों मनाया जाता है और इसके पीछे की क्या वजह है।

धनतेरस क्यों मनाया जाता है?
शास्त्रों के अनुसार, समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में कलश लेकर प्रकट हुए थे। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को ही धन्वंतरि जी कलश लेकर प्रकट हुए थे। यही कारण है कि इसी दिन बर्तन खरीदने की परंपरा आज तक चली आ रही है। कथाओं के अनुसार, भगवान धन्वंतरि को विष्णुजी का अंश भी माना जाता है। इन्होंने ही पूरी दुनिया में चिकित्सा विज्ञान का प्रचार और प्रसार किया है। धन्वंतरि जी के प्रकट होने के 2 दिन बाद समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। इसलिए दिवाली का त्योहार उस दिन मनाया जाता है।

धनतेरस पौराणिक कथा
एक समय की बात है जब मृत्यु के देवता यमराज ने यमदूतों से पूछा की क्या कभी मनुष्य के प्राण लेते वक्त तुमको कभी किसी पर दया आती है। यमदूतों ने कहा, नहीं महाराज हम तो केवल आपके दिए हुए निर्देशों का पालन करते हैं। इस पर यमराज ने कहा कि बेझिझक होकर मुझे बताओ की क्या कभी मनुष्य के प्राण लेने में तुम्हें किसी पर दया आती है। इसका उत्तर देते हुए एक यमदूत ने कहा- एक बार ऐसी घटना हुई है, जिसको देखकर हृदय पसीज गया था। एक दिन हंस नामक राजा शिकार पर निकला था और वह जंगल के रास्ते में भटक गया। इसके बाद, भटकते-भटकते दूसरे राजा की सीमा पर पहुंच गया। उस स्थान पर हेमा नाम का शासक था, उसने पड़ोस के राजा का खूब आदर-सत्कार किया और उसी दिन राजा की पत्नी ने एक पुत्र को जन्म दिया

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