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शताब्दीपुरम में बिजली का थर्ड डिग्री टार्चर

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जबलपुर, यशभारत। शहर में पिछले छह माह से अधिक समय से बिजली कंपनी द्वारा संधारण कार्य किया जा रहा है। इसके लिए रोजाना कई इलाकों में अघोषित बिजली कटौती की जा रही है। भीषण गर्मी का दौर है, जिसमें अभी हाल ही में तापमान 40 से 42 डिसे के आसपास झूल रहा है। ऐसे में बिजली गुल होने से इन कालोनी व मोहल्लों के रहवासियों को थर्ड डिग्री टार्चर झेलना पड़ रहा है। उखरी क्षेत्र में शताब्दिपुरम के हाल तो बेहद खराब हैं इस ऐरिया में ऐसा कोई दिन नहीं जाता कि बिजली न जाती हो। एक बार नहीं दिन में कई बार बिजली गुल हो जाती हैं। कभी जम्फर गिर जाता है तो कभी फ्यूज हो जाता है। जबकि सबस्टेशन से लगी कालौनी में निर्बाध रूप से आपूर्ति बनी रहती है। यश भारत ने जब इसका कारण जानने पड़ताल की तो सबसे प्रमुख कारण ट्रांसफार्मर के नीचे बने विद्युत सप्लाई के बक्सों में दरवाजे न होना, अधिकांश में दरवाजे ही नहीं हैं। इससे जहां हवा के चलते ही बिजली गुल हो जाती है।

बिजली कंपनी के काल सेंटर में बीते कुछ समय में ढेरों शिकायतें पहुंची। जानकारों की माने तो शहर के कई ट्रांसफार्मर ओवरलोड हैं। इनमें नगर संभाग पूर्व और उत्तर के इलाके शामिल हैं। पहले फाल्ट ढूंढो, फिर सुधारो का जो मैकेनिज्म है वह ही अघोषित कटौती का टाइप बढ़ाता है। खासबात यह है कि बिजली कंपनी द्वारा घोषित कटौती में जो टाइम स्लाट बताया जाता है उसके एक घंटे बाद तक बिजली सप्लाई बहाल नहीं हो पाती है।
अघोषित कटौती के कारण
मैदानी अमले को पेट्रोलिंग कर फाल्ट ढूंढना पड़ता है। इसके बाद उसे सुधारा जाता है। इससे डेढ़ घंटे और इससे ज्यादा तक का समय लग जाता है। जिन इलाकों में बिजली चोरी होती है उससे सटी पाश कालोनियों में लोड ज्यादा होने के कारण बार-बार ट्रिपिंग होती है। तेज हवा से पेड़ों की टहनियां बिजली लाइनों से टकराती हैं इस कारण फाल्ट आ जाता है। घनी बस्ती क्षेत्रों में तो बिजली के तारों का मकडज़ाल आए दिन बिजली आपूर्तिबाधित करते हैं। जबकि तारों को हटाकर केबल डालने का काम शुरू तो हुआ पर कई क्षेत्रों में आज भी केबल नहीं डाले गए ।
विद्युत बोर्ड बिल समय पर जमा न होने पर बिजली सप्लाई बंद करने में देरी नहीं करता है, लेकिन जब बात अपने संसाधनों को सुधारने की आती है तो उतना उत्साह नहीं दिखाता है। पूरे शहर में लटकते तारो व ट्रांसफार्मर के खुले बाक्स लोगों के लिए आफत बन सकते हैं। विभाग न तो तारों को बदल रहा है और न ही ट्रांसफार्मरों की सुरक्षित रखने करने के लिए कोई कदम उठा रहा है। खुले में ट्रांसफार्मर रखकर बिजली कंपनी आम लोगों की जान से खिलवाड़ कर रही है। अधिकांश ट्रांसफार्मर बिना जालियों के लगे हैं। साथ ही इनके खुले तार लटक रहे हैं। अगर इन हालातों में सुधार नहीेंहुआ तो आने वाले बरसात के मौसम में हादसों का खतरा बढ़ जाएगा। शताब्दिपुरम में ट्रांसफार्मर खुले में होने से कभी भी हादसा हो सकता है। गर्मी में लोड अधिक होता है। ऐसे में घटना होने का अंदेशा रहता है। बिजली कंपनी ने ट्रांसफार्मर को सुरक्षित रखने के लिए तमाम नियम बनाए हैं। जैसे कि ट्रांसफार्मर को चबूतरे पर रखना चाहिए, ट्रांसफार्मर में आने वाली सप्लाई के तारों में गार्डिंग लगी होना चाहिए, ट्रांसफार्मर को जाली के घेरे में रखना चाहिए आदि।
लेकिन कंपनी खुद ही इन नियमों से खिलवाड़ कर रही है। कंपनी ने बाजार में ट्रांसफार्मर असुरक्षित छोड़ दिए हैं। जिससे आम लोगों को करंट लगने का भय बना रहता है। ट्रांसफार्मर के आस-पास जाली का घेरा नहीं बनाया गया है। केवल खुले में ट्रांसर्फामर लगा दिए हैं। यहां बच्चों के इन चारों की चपेट में आने की संभावना रहती है। प्रति दिन इन रास्तों से लोगों को आवा-गमन रहता है। इस तरफ बिजली कंपनी का कोई ध्यान नहीं है।

 

इन्होंने कहा…..

शताब्दी पुरम सहित अनेक जगह ट्रांसफार्मर खुले होने की पुष्टिकर तत्काल कार्रवाई की जाएगी और संबंधित अधिकारियों के साथ जाकर निरीक्षण किया जाएगाl

संजय अरोरा, अधीक्षण अभियंता सिटी

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