गिरने में मजा है, गिरेंगे तो उठेंगे ही – त्रिपाठी – राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय नई दिल्ली के निदेशक, अभिनेता, रंगकर्मी चित्तरंजन त्रिपाठी से खास मुलाकात
गिरने में मजा है, गिरेंगे तो उठेंगे ही – त्रिपाठी
– राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय नई दिल्ली के निदेशक, अभिनेता, रंगकर्मी चित्तरंजन त्रिपाठी से खास मुलाकात
भोपाल यशभारत। समाज समाज शास्त्र का नाट्य शास्त्र के साथ गहरा संबंध है। जब चलना सीखते हैं तो गिरते हैं, गिरने में मजा है गिरेंगे तो उठेंगे ही। एनएसडी का डायरेक्टर बनने का सफर मुश्किल नहीं बल्कि मजेदार रहा है। युवाओं को जागरूक करने के लिए एनएसडी की ओर से कई तरह से प्रयास किए जा रहे हैं उन तक पहुंच रहे हैं और जागरूक भी कर रहे हैं। यह बात एनएसडी यानि राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा) नई दिल्ली के निदेशक और सुप्रसिद्ध अभिनेता रंगकर्मी चित्तरंजन त्रिपाठी ने यश भारत से खास बातचीत में कही। निदेशक त्रिपाठी गुरुवार को रविंद्र भवन में आयोजित हरिहर राष्ट्रीय नाट्य समारोह में शामिल होने के लिए आए हुए थे। उनके द्वारा लिखे गए नाटक समुद्र मंथन को लेकर भी चर्चा की।
एनएसडी डायरेक्ट त्रिपाठी ने बकहा कि नाटक हमेशा जीवित रहेंगे। नाटक को खतरा हनी है। भले ही एआई आ जाए। लोग रिकार्डेड इमेज देखना पसंद नहीं करते। जीवित व्यक्ति जीवित को ही देखना चाहता है। नाटक की कमी लोगों को अखरती है।
सोशल इकोनामिक एटीट्यूड होना चाहिए
त्रिपाठी ने कहा कि जिस तरह फिल्म देखने जाते हैं वहां एक हजार रुपए खर्च करते हैं। उसी तरह नाटकों में भी वातावरण मिलना चाहिए। लोग नाटक देखने के लिए पास मांगने लगते हैं। यह गलत है। नाटक कलाकार को नाटक का नशा होता है। कलाकार को पैसे मिलें चाहे ना मिले वह नाटक करेगा ही। हमे जरूरत है कि सोशल इकोनामिक एटीट्यूड अपनाया जाए।
गालियां समाज में लिमिटेड है
वेबसीरीज में दिखाई जा रही अश£ीलता और गाली गलौच को लेकर उनका कहना था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नाम दिया जा रहा है। गालियां समाज में लिमिटेड है, इससे ज्यादा और क्या दिखाएंगे। उन्होंने कहा कि मैं भी इस पार्ट का हिस्सा हूं।
युवाओं को कर रहे जागरूक
एनएसडी द्वारा नाटक कलाकारों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। त्रिपाठी ने इसे लेकर चर्चा करते हुए बताया कि कई कलाकार ऐसे हैं जिनके पास डिग्री नही है, लेकिन वे बाहर नाटक कर रहे हैं वे भी हमारे बंधु हैं। एनएसडी का प्रयास है कि लोगों को जागरूक किया जाए कि हर सेगमेंट के लोगों को प्रशिक्षण दिया जाए।







