चोरी चोरी चुपके चुपके बढ़ा दिए दूध के दाम ना प्रशासन को खबर ना जनप्रतिनिधियों को हवा

जबलपुर यश भारत। आमतौर पर देखने में आया है कि गर्मी के सीजन में दूध के दामों में बढ़ोतरी होती है लेकिन इस बार तो डेयरी मालिकों और संचालकों ने चोरी चोरी चुपके चुपके बीच बरसात में ही दूध के दामों में 3 रूपये लीटर की बढ़ोतरी कर दी। दो-चार दिन पहले तक जो दूध 70 रुपये लीटर मिलता था उसके रेट अब 73 रुपए लीटर हो गए हैं और यह भी ग्राहकों को बिना किसी पूर्व सूचना के सुबह-सुबह जब लोग दूध लेने पहुंचे तो पता चला कि दाम बढ़ गए हैं। हर वर्ष गर्मी के सीजन में दूध के दामों में बढ़ोतरी होना तो आम बात है पहले तीन-चार रुपए बढ़ाये जाते है और जब हो हल्ला मचता है तो एक दो रुपए लीटर कम कर दिए जाते हैं। यह वर्षों से होता चला आ रहा है। लेकिन इस बार बारिश के मौसम में और त्योहार के मौके पर दूध के दामों में बढ़ोतरी लोगों के गले नहीं उतर रही है। हालांकि अभी कुछ डेरी संचालक पुराने रेट पर ही दूध बेच रहे हैं लेकिन उनका यह कहना है कि एक तारीख से दूध 73 रुपये लीटर ही बिकेगा। वहीं कुछ लोग तो यह भी बता रहे हैं कि अभी तो सिर्फ प्रयोग किया जा रहा है डेयरी संचालको की इच्छा तो दूध के दाम 75 रुपए प्रति लीटर करने की है। और यदि आने वाले दिनों में ऐसा होता है तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। पीड़ित उपभोक्ताओं ने तो सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया देना भी शुरू कर दिया है लेकिन अब तक प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को शायद इस बात की खबर ही नहीं है क्योंकि दाम बढ़ने के बाद भी जिस तरह का सन्नाटा है वह सोचने पर विवश करता है।
एक खबर ऐसी भी
दूध के दामों में की गई बढ़ोतरी के बीच चर्चाओं में एक खबर ऐसी भी निकाल कर सामने आ रही है कि अब देरी संचालकों ने भी शराब ठेकेदारों की तरह सिंडिकेट बना लिया है और इसी सिंडिकेट में तय किया गया है कि दूध के दाम 75 रुपए करने हैं। अब इस बात में कितनी सच्चाई है यह तो डेरी संचालक ही अच्छे से बता सकते हैं लेकिन इस कारोबार से जुड़े लोग दबी जबान से इसकी पुष्टी भी करते हैं। वैसे भी वर्षों से यह मांग उपभोक्ताओं के द्वारा उठाई जाती रही है कि दूध जैसी आवश्यक वस्तु पर भी इस तरह की मनमानी पर रोक लगाने के लिए प्रशासन को कोई सख्त कदम उठाकर गाइडलाइन तय करनी चाहिए लेकिन जब कभी दूध के दाम बढ़ते हैं तो प्रशासन के लोग जागते हैं और फिर बीच का रास्ता निकालकर मामले को शांत कर दिया जाता है और यह सब डेयरी वालों को भी मालूम है और इसीलिए जब उनकी इच्छा होती है तो वह पहले से गुणा गणित लगाकर ऐसे दाम तय करते है कि यदि ज्यादा दबाव बना तो एक दो रूपये काम करने के बाद भी फायदे में वे ही रहेंगे। ऐसी मैं जरूरी हो जाता है कि शुरुआती दौर में ही प्रशासन और जनप्रतिनिधि आगे आकर इस दिशा में आगे कोई कार्यवाही सुनिश्चित करें नहीं तो यह मनमानी आने वाले दिनों में लोगों के लिए परेशानी का सबब बनने वाली है।







