गोहलपुर की जर्जर पानी टंकियाँ बन सकती हैं हादसे का कारण अतिक्रमणकारियों की भी नजर
आनंदनगर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी की टंकी, बनी खतरे की घंटी

गोहलपुर की जर्जर पानी टंकियाँ बन सकती हैं हादसे का कारण
अतिक्रमणकारियों की भी नजर
जबलपुर, यश भारत। शहर के कई इलाकों में बरसों पुरानी पानी की टंकियाँ अब हादसे को दावत दे रही हैं। आनंदनगर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी और गोहलपुर थाने के पास स्थित दो प्रमुख टंकियाँ ऐसी ही उपेक्षा का शिकार हैं, जो न केवल बेकार पड़ी हैं बल्कि अब जर्जर हो चुकी हैं। किसी भी दिन ये धराशाई होकर गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती हैं। स्थानीय नागरिकों की लगातार शिकायतों के बाद भी न तो हाउसिंग बोर्ड और न ही नगर निगम ने इन पर गंभीरता से ध्यान दिया है। शहर में कई स्थानों पर खड़ी हैं अनुपयोगी टकियाँ जानकारों का कहना है कि जबलपुर शहर में ऐसी कई पुरानी टंकियाँ हैं जो अब किसी उपयोग की नहीं रहीं। न तो वे जल आपूर्ति में उपयोग हो रही हैं और न ही उनकी मरम्मत होती है। इन टंकियों की संरचना धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है, जिससे हादसे का खतरा बढ़ता जा रहा है। आनंदनगर और गोहलपुर की टंकियों सिर्फ दो उदाहरण हैं, जबकि पूरे शहर में ऐसी कई जर्जर संरचनाएँ हैं जो किसी न किसी अनहोनी का कारण बन सकती हैं। नागरिकों की यही मांग है कि नगर निगम जल्द से जल्द शहरभर में पुरानी पानी की टंकियों का सर्वे कराए, ताकि शहर को संभावित दुर्घटनाओं से बचाया जा सके।

50 साल पुरानी संरचना खतरे में गोहलपुर थाने के पास कॉर्नर पर बनी यह टंकी करीब 50 वर्ष पुरानी बताई जाती है। लंबे समय से इसकी न तो सफाई हुई और न ही मरम्मत। समय और मौसम की मार से इसका दांचा कमजोर हो गया है। टंकी के आसपास भी अतिक्रमण ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। स्थानीय दुकानदारों और निवासियों का कहना है कि रात के समय यहां नशेड़ी और संदिग्ध लोग जमा होते हैं। कोई भी हादसा कभी भी घट सकता है। लोगों ने कई बार शिकायतें की, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। आनंदनगर और गोहलपुर दोनों ही स्थानों के निवासियों का कहना है कि नगर निगम और हाउसिंग बोर्ड को जल्द से जल्द इन टंकियों का निरीक्षण कर इन्हें ध्वस्त करना चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में कोई बड़ा हादसा होने पर जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाएगा।
ओहलपुर वाने के फल 50 साल पुराने यह पनी की टंकी अब कर उसमें है

आनंदनगर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी की टंकी, बनी खतरे की घंटी
आनंदनगर बस स्टॉप के भीतर स्थित यह पानी की टंकी बरसों से बिना किसी उपयोग के खड़ी है। अब इसकी दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं और लोहे की सीढ़ियाँ जंग खा चुकी हैं। टंकी के चारों ओर झाड़-झंखाड़ व गंदगी जमा हो चुकी है, जिससे यह इलाका असामाजिक तत्वों का ठिकाना बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम ढलते ही यहां नशेड़ी और संदिग्ध लोग दिखाई देते हैं, जिससे रहवासियों में डर बना रहता है। इतना ही नहीं, टंकी के आसपास की खाली जमीन पर अतिक्रमणकारियों ने भी कब्जा करना शुरू कर दिया है। लोगों की मांग है कि इस जर्जर टंकी को गिराकर
अनंदनगर हाउसिंग बोर्ड में यह जर्जर पानी की टंकी
उस स्थान को हाउसिंग बोर्ड या नगर निगम अपने उपयोग में ले ताकि भविष्य में कोई हादसा न हो।

इस विषय पर जब नगर निगम कमिश्नर राम प्रकाश अहिरवार से चर्चा की गई तो उन्होंने 6 कहा कि नगर निगम इन सभी टंकियों और संबंधित स्थानों का निरीक्षण करवाएगा। उन्होंने कहा निरीक्षण के बाद जो भी रिपोर्ट सामने आएगी, यदि टकियाँ अनुपयोगी या खतरनाक पाई जाती हैं, तो उन्हें गिरवाने की कार्रवाई की जाएगी। सुरक्षा और सार्वजनिक हित हमारी प्राथमिकता है।
राम प्रकाश अहिरवार, नगर निगम कमिश्नर







