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कभी 30 तो कभी चार ग्रुप बनाने की चर्चा, शराब दुकानों को लेकर संशय बरकरार

जबलपुर यश भारत। जिले की शराब दुकानों के आवंटन को लेकर नित नई चर्चाएं शराब कारोबारियो के बीच चल रही है कभी यह सामने आता है कि पूरे जिले की शराब दुकानों के लिए समूह कम कर दिए जाएंगे और इनकी संख्या 30 होगी और प्रत्येक समूह में नई दुकान जोड़ दी जाएगी तो कभी यह बात निकल कर सामने आती है कि पूरे जिले की दुकानों को उत्तर दक्षिण पूर्व पश्चिम चार समूहों में बांटकर दुकानों का आवंटन टेंडर के जरिए किया जाएगा लेकिन इसको लेकर भी अभी कोई अधिकृत जानकारी सामने नहीं आई है। सूत्रों की मांने तो 3 तारीख तक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी कि आगे विभाग क्या प्रक्रिया अपनाता हैं। वहीं दूसरी तरफ यह चर्चाएं भी सरगरम है कि यदि चार समूह बनाए गए तो बाहरी ठेकेदारों की घुसपैठ बढ़ जाएगी वही जिले के शराब ठेकेदार भी संभवतः सिंडिकेट बनाकर दुकान ले ले यदि यह प्रक्रिया अपनाई गई तो छोटे ठेकेदार मैदान से बाहर नजर आएंगे। कुल मिलाकर नई शराब नीति के जारी होने के बाद और दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद से ही जिस तरह से जिले के शराब ठेकेदार उदासीन रवैया अपनाए हुए हैं उससे आबकारी विभाग यह गुणा भाग करने में लगा है कि किस प्रक्रिया के तहत दुकानों का आवंटन किया जाए जिससे पूर्व निर्धारित लक्ष्य की पूर्ति हो सके।

जिले में संचालित होने वाली शराब दुकानों के आवंटन को लेकर आबकारी विभाग लगातार माथापच्ची करने में लगा है। रिनूवल के जरिए लाइसेंस फीस बढ़ाकर दुकान आवंटित करने की प्रक्रिया पूरी न होने के बाद लॉटरी सिस्टम भी विफल हो गया। इन दोनों प्रक्रियाओं से ठेकेदारों ने खुद को दूर रखा जिसके चलते एक भी समूह आवंटित नहीं हो सका। इसके बाद अब आबकारी विभाग एक नई प्रक्रिया के तहत दुकानों को आवंटित करने की कवायद में जुट गया है। दुकानों का आवंटन अब टेंडर प्रक्रिया से निष्पादित किया जाएगा इसकी प्रक्रिया 4 मार्च से 7 मार्च के बीच पूरी होगी अब देखना यह है कि इस नई कवायद में आबकारी विभाग कितना सफल हो पाता है। सूत्रों की मांने तो नए सत्र मै जिले की दुकानों से करीब 939 करोड़ रुपए राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा गया है जबकि वर्ष 2024 25 के लिए यह राशि 724 करोड़ के आसपास थी ऐसे में ठेकेदारों की उदासीनता के चलते आबकारी विभाग निर्धारित लक्ष्य हासिल कर पाता है या नहीं। नए सत्र के लिए दुकानों के आवंटन को लेकर आबकारी विभाग ने सबसे पहले यह शर्त रखी थी कि 20% अधिक राशि देकर दुकानों का रिनुअल कर दिया जाएगा लेकिन इसके लिए कोई भी ठेकेदार आगे नहीं आया इसके बाद दूसरी प्रक्रिया में लॉटरी सिस्टम के जरिए दुकानों के आवंटन का मार्ग अपनाया गया लेकिन यह भी फ्लॉप रहा। इसके बाद अब नए सिरे से टेंडर के जरिए दुकानों का आवंटन करने की कवायद की जा रही है। अब यह तो 7 तारीख के बाद ही पता चल पाएगा कि आबकारी विभाग की यह नई कवायद ठेकेदारों को रास आती है या नही। या फिर नये सिरे से कुछ और करना पड़ जाएगा। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश शासन के द्वारा नई आबकारी नीति को जारी किए जाने के बाद से ही ठेकेदार उदासीन से नजर आ रहे हैं और उनकी नजर में 20%राजस्व बढाया जाना घाटे का सौदा लग रहा है।

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