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कुछ के सपनों को लगे पंख और कुछेक के सपने टूटने की ओर: कांग्रेस का संगठन सृजन अभियान से हलचल

जबलपुर यश भारत। कांग्रेस संगठन को मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से कांग्रेस संगठन सृजन अभियान लॉन्च किया गया है। जिसकी शुरुआत पिछले दिनों प्रदेश की राजधानी भोपाल में खुद पार्टी के राष्ट्रीय नेता और वर्तमान में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने की। श्री गांधी तो अभियान की शुरुआत करके चले गए लेकिन उसके बाद से राजनीतिक गलियारों में इस पूरे अभियान को लेकर तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार सरर्गम है। और इसके पीछे की मुख्य बजह यह है कि इसकी रणनीति और कमान खुद पार्टीआलाकमान यूं कहें कि राहुल गांधी ने अपने हाथों में ले रखी है। कांग्रेस के वह नेता जो वर्षों से पार्टी के लिए काम कर संगठन को मजबूती दिलाना चाहते थे उनकी कोशिशो पर ब्रेक लगा हुआ था। और यह ब्रेक लगा था पार्टी में मौजूद छात्रपो के कारण अब जबकि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के द्वारा संगठन को जिंदा और रिफॉर्म करने की जो कवायद इस अभियान के जरिए शुरू की गई है और जिस तरह से राहुल गांधी ने संगठन की शुरुआत के मौके पर जो बातें कहीं उसके चलते जिनके सपने सपने बनकर रह गए थे उन्हें पंख लग गए हैं और भी उम्मीद से लबरेज नजर आने लगे हैं। और अभी तक जो नेता और कार्यकर्ता अपने आकाओं की मदद से संगठन में काबिज होते रहे हैं उनके सपने टूटने की ओर बढ़ रहे हैं। हालांकि कांग्रेस का अभियान कितना प्रभावी साबित होता है यह तो आने वाला समय ही बताएगा लेकिन जिस तरह की शुरुआत की गई है उससे यह स्पष्ट झलक तो जरूर मिलती है कि आने वाले समय में कांग्रेस में बड़े बदलाव देखे जा सकते हैं। अभियान की शुरुआत के साथ ही केंद्रीय और प्रादेशिक नेतृत्व के द्वारा पर्यवेक्षकों की नियुक्तियां भी कर दी गई है और उन्हें गाइडलाइन के अनुसार कार्य करने की दिशा निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। श्री गांधी ने स्पष्ट कहा है कि अब मैदानी स्तर के नेताओं और कार्यकर्ताओं को मौका दिया जाएगा जिला अध्यक्षों को न केवल ज्यादा पावरफुल बनाया जाएगा बल्कि उन्हें इतनी शक्ति प्रदान की जाएगी की चुनाव चाहे पार्षद का हो विधायक का या सांसद का जिला अध्यक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। पर्यवेक्षक बनाए गए लोगों को भी स्पष्ट कर दिया गया है कि उनकी भूमिका पारदर्शी होनी चाहिए। जिलों के दौरा के
समय पर्यवेक्षक ना तो नेताओं से मिलेंगे और ना ही सामूहिक भोज जैसे कार्यक्रमों में शामिल होंगे। जिस किसी भी तरह के पक्षपात का संदेश न जाए। पर्यवेक्षकों के काम और संगठन के कार्य में किसी का भी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। श्री गांधी ने तो
इशारों इशारों में यह भी संदेश दे दिया कि अब उम्र दराज नेताओं को रिटायरमेंट लेकर नए लोगों को आगे आने का मौका देना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस नेताओं को गुटबाजी से दूर रहने की भी नसीहत दी है और यही सबसे बड़ी समस्या कांग्रेस की है जिस पर प्रभावी रोक कैसे लगेगी यह कठिन सवाल है।

कार्यकर्ताओं का जोश है हाई

जब से कांग्रेस राजन अभियान की शुरुआत करके राहुल गांधी गए हैं तभी से ऐसे नेता और कार्यकर्ताओं का जोश हाई है जो मेहनत तो खूब कर रहे थे लेकिन हथिये पर पड़े थे। दिग्गजो के कृपा पात्र गुणा भाग करके संगठन पर कागज हो जाते थे और फिर संगठन को अपने तरीके से चलाते थे। लेकिन कांग्रेस का यह अभियान यदि सफल हो जाता है तो अब कृपा पात्रों का जमाना रवाना होने वाला है।

दिग्गजो की चिंता की वजह

श्री गांधी तू तो अभियान की शुरुआत करके चले गये लेकिन प्रदेश से लेकर जिले तक के राजनीतिक गलियारों में अब इन बातों को लेकर चर्चाएं हैं कि यदि यह अभियान सफल हो जाता है तो फिर उन दिग्गज नेताओं का क्या होगा जो अभी तक संगठन को अपनी जागीर समझते थे। नये संगठन के आकार और उसमें उनकी क्या भूमिका होगी इसको लेकर ऐसे दिग्गजों में चिंता सी दिखाई दे रही है।

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