सिया विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, दायर हुई जनहित याचिका

- भोपाल, आशीष शुक्ला।
राज्य स्तरीय समाघात निवारण प्राधिकरण याने कि सिया का विवाद अब सरकारी पत्राचारों और कार्यालय से निकलकर सुप्रीम कोर्ट की दहलीज़ तक पहुंच गया है। जिसको लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई है अब देखना होगा कि कोर्ट इस मामले में कितना दखल देता है । पूर्व नौकरशाह और वर्तमान नौकरशाही का यह टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है जो पहले कार्यालय तक सीमित था उसके बाद खुली लड़ाई में बदल गया और अब यह पूरा मामला कोर्ट की दहलीज पर पहुंच गया है।
इस पूरे मामले को लेकर याचिका करता द्वारा अलग-अलग बिंदु उठाए गए हैं। जिसमें अनियमिता से लेकर बैठक में लिए गए निर्णय पर सवाल खड़े कर गए हैं। हालांकि इस पूरे मामले में पहले ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल से लेकर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय तक पत्राचार हो चुका है, इसमें दोनों ही पक्ष अपने-अपने स्तर पर अपनी बातें रख रहे हैं । हालांकि मामले में पर्यावरण मंत्रालय के मुख्य सचिव और सिया की सदस्य सचिव सार्वजनिक तौर पर तो कुछ भी कहने से बच रहे हैं लेकिन एक बहुत बड़ी टीम है जिसमें कुछ एक्टिविस्ट आरटीआई कार्यकर्ता है जो कई मंचों पर इस विवाद को उठा चुके हैं।
अनुमति को लेकर है विवाद
एक तरफ जहां सिया के अध्यक्ष द्वारा गलत तरीके से कुछ मामलों में अनुमति दे दी गई जबकि इस प्रकृति के अन्य मामले थे जिन में अनुमति प्रदान नहीं करी गई वहीं दूसरी तरफ पर्यावरण मंत्रालय द्वारा सिया में लंबे समय से अटकी हुई फ़ाइल के मामले में अनुमति प्रदान कर दी गई जिसे दूसरा पक्ष पूरी तरह से नियम वृद्धि बता रहा है और अपने अधिकार क्षेत्र में अतिक्रमण करार दे रहा है। दो नौकरशाहों की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद किस तरफ जाती है और कोर्ट इस पूरे मामले में कितनी गंभीरता दिखता है यह देखना होगा।







