एचपीवी टीकाकरण में सीएमएचओ को कारण बताओ नोटिस 52 जिलों में 49वें स्थान पर, लक्ष्य का सिर्फ 14.77% पूरा एनएसयूआई ने उठाए सवाल

एचपीवी टीकाकरण में सीएमएचओ को कारण बताओ नोटिस
52 जिलों में 49वें स्थान पर, लक्ष्य का सिर्फ 14.77% पूरा एनएसयूआई ने उठाए सवाल
भोपाल यश भारत। महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए चल रहे एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान में राजधानी भोपाल का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है। प्रदेश के 52 जिलों में भोपाल 49वें स्थान पर पहुंच गया है जिससे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। इस लापरवाही पर सख्त रुख अपनाते हुए अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने भोपाल के सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। शासन ने सात दिन के भीतर जवाब तलब करते हुए स्पष्ट किया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर एक वेतनवृद्धि रोकने की कार्रवाई की जा सकती है। नोटिस में लापरवाही का जिक्र ,जारी नोटिस में सीएमएचओ की कार्यशैली को उदासीन बताते हुए कहा गया है कि राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम की मॉनीटरिंग और सुपरविजन ठीक से नहीं किया जा रहा है, जिससे जिले और प्रदेश की उपलब्धियों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। लक्ष्य से बहुत पीछे भोपाल , 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए इस अभियान के तहत भोपाल जिले के लिए 28,963 किशोरियों को टीका लगाने का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन एक माह से अधिक समय बीतने के बाद भी केवल 4,278 किशोरियों का ही वैक्सीनेशन हो पाया है। यह लक्ष्य का महज 14.77 प्रतिशत है, जिसे विभाग ने गंभीर लापरवाही माना है।जहां भोपाल पिछड़ रहा है वहीं प्रदेश के अन्य जिलों में टीकाकरण की रफ्तार बेहतर है। 7 अप्रैल तक मध्यप्रदेश में 4 लाख 13 हजार 301 किशोरियों को एचपीवी वैक्सीन लगाई जा चुकी है। प्रदेश में कुल लक्ष्य 8 लाख 3 हजार 684 निर्धारित किया गया है। पिछड़े जिलों में इंदौर भी शामिल , वैक्सीनेशन में पिछड़े जिलों की सूची में इंदौर, रीवा, सीधी, भोपाल और शहडोल के नाम भी शामिल हैं हालांकि अधिकांश जिलों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रगति दिखाई है एनएसयूआई ने लगाए गंभीर आरोप, मामले को लेकर एनएसयूआई ने भी स्वास्थ्य विभाग पर निशाना साधा है। संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने आरोप लगाया कि सीएमएचओ स्वास्थ्य सेवाओं के बजाय अन्य कार्यों में अधिक व्यस्त रहते हैं और जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. रितेश रावत के साथ मिलकर फर्जी निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करते हैं। वहीं जिलाध्यक्ष अक्षय तोमर ने कहा कि पूर्व में लोकायुक्त में प्रकरण दर्ज होने के बावजूद संबंधित अधिकारी को राजधानी की जिम्मेदारी देना गंभीर सवाल खड़े करता है। संगठन ने सीएमएचओ के तत्काल निलंबन और निष्पक्ष जांच की मांग की है।






