जबलपुर के डीपीएम को लेकर विधानसभा में हंगामा, कांग्रेस ने किया वॉकआउट • शिक्षा विभाग की अलग जांच, स्वास्थ्य विभाग की अलग, जांच यह सदन की गरिमा का सवाल

जबलपुर के डीपीएम को लेकर विधानसभा में हंगामा, कांग्रेस ने किया वॉकआउट
• शिक्षा विभाग की अलग जांच, स्वास्थ्य विभाग की अलग, जांच यह सदन की गरिमा का सवाल
• जिला स्तर की शांति समिति का पुर्नगठन होगा
• महिलाओं के नाम रहा विधानसभा का प्रश्रकाल
आशीष शुक्ला, विधानसभा लाइव। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन जबलपुर के जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) को लेकर विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच काफी देर सवाल-जवाब चलते रहे। एक अधिकारी ने जांच को स्वास्थ्य विभाग ने जहां क्लीन चिट दी है वहीं कांग्रेस के विधायक लखन घनघोरिया का कहना था कि शिक्षा विभाग का कहना है कि उसके रिाकर्ड के अनसार सबंधित अफसर ने परीक्षा ही नहीं दी है। ऐसे में सदन की गरिमा का ध्यान नहीं रखा जा रहा है जो काफी खेदजनक है। ऐसे अधिकारी को हटाने में भी स्वास्थ्य सरकार पीछे हट रही है। सदन की गरिमा को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने 12.25 पर वॉकआउट कर दिया। विधानसभा में मंगलवार के दिन यह परंपरा है कि 12 बजे तक का प्रश्रकाल सिर्फ महिला विधायकों के लिए ही होता है। महिला विधायकों की चर्चा में सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई कि वर्षों से जिला स्तर की शांति समिति के पुर्नगठन के लिए शासन ने दिशा निर्देश दो माह के अंदर जारी कर दिए हैं। विधानसभा में आज कार्रवाई की शुरूआत में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के निधन पर शोक संवेदनाएं दी गईं। पांच मिनिट उनके सम्मान में विधानसभा स्थगित रखी गई। सदन की शुरूआत पांच मिनिट बाद जब हुई तो अध्यक्ष की आसंदी में भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय विश्रोई ने संचालित की। कार्रवाई शुरू होते ही कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने कहा कि प्रश्रों के जवाब नहीं आ रहे हैं। इस पर अध्यक्ष की आसंदी पर बैठे अजय विश्रोई ने कहा कि आज महिला विधायकों के लिए सदन ने महिला सशक्तिकरण को ध्यान में रखकर समय रखा गया है। अभी सदन को चलने दें। इसके बाद महिला विधायक अनुभा मुंजारे, झूमा सोलंकी, सेना पटेल, चंदा सुरेंद्र सिंह गौर ने अपने-अपने क्षेत्र के विकास एवं समस्याओं के सवाल रखे। महिलाओं के सवाल जवाब संबधित मंत्रियों ने दिए। भाजपा विधायक नीना वर्मा ने जिले की शांति समिति को लेकर सवाल किया कि 1987 के बाद जिला शंाति समिति के गठन में कोई भी बदलाव नहीं हुआ है। वर्षों से जो शंाति समिति में हैं उन्हीं में नाम बढ़ते जा रहे हैं, जबकि जिले के लिए यह एक महत्वपूर्ण समिति होती है। समय-समय पर इसका पुर्नगठन होना चाहिए। इस पर मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने आश्वसत किया कि दो माह के अंदर पूरे प्रदेश की जिला समिति का पुर्नगठन का प्रस्ताव शासन स्तर पर भेज दिया जाएगा। जिसमें थाना स्तर तक की समिति की गठन किया जाएगा। लगभग 12 बजे विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने अपनी आसंदी संभाली। श्री तोमर ने कहा कि शून्य काल में जो विधायकों ने पत्र दिए हैं वे पढ़े हुए माने जाएंगे। इसके बाद उन्होंने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा होगी। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत जबलपुर पूर्व के विधायक लखन घनघोरिया ने जबलपुर के जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) विजय पांडे की मार्कशीटें फर्जी होने का सवाल उठाया। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल जिनके पास स्वास्थ्य विभाग भी है, उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारी की दो स्तर पर जांच हो चुकी हैं उनकी मार्कशीट सही पाई गई है। इस पर विधानसमें विधायक लखन घनघोरिया ने जबलपुर में विक्टोरिया हॉस्पिटल के अधिकारी की शैक्षणिक योग्यता फर्जी है। इसकी पुष्टि सदन में शिक्षा मंत्री ने भी की है। श्री घनघोरिया ने कहा कि जबलपुर जिले के जिला स्वास्थ्य अधिकारी ही ज्वाइंट डायरेक्टर हैं। दोनों व्यक्ति एक ही पद पर एक व्यक्ति की जांच कर रहा है यह कहां तक न्याय संगत है। इस पर श्री शुक्ला ने कहा कि वे फिर से राज्य स्तर के अधिकारी को भेजकर जांच करा लेंगे। जो जांच रिपोर्ट उनके पास है, उसमें संबंधित व्यक्ति की शैक्षणिक योग्यता फर्जी नहीं बताई गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, विधायक अजय सिंह समेत अन्य कांग्रेस विधायकों ने कहा कि मंत्री इस मामले में कार्यवाही नहीं करना चाहते हैं। विधायक अजय सिंह ने कहा कि दो विभाग अलग -अलग जानकारी दे रहे हैं, यह सदन की अवमानना है। स्वास्थ्य मंत्री उस अधिकारी को पद से हटाकर राज्य की जांच कमेटी से जांच कराने तैयार हैं तो उन्हें हटाने में क्या दिक्कत है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जब हमारी जांच में संबंधित अधिकारी निर्दोष पाए जाए जा रहे हैं तब निर्दोष व्यक्ति को कैसे हटा दें। सवाल यह उठता है कि राज्य स्तरीय जांच फिर से हो जाएगी तो बात सामने आ जाएगी। कांग्रेस विधायकों ने कहा कि शायद उनकी संबंधित अधिकारी पर विशेष कृपा है। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस ने सदन से वॉक आउट कर दिया। बाहर आकर कांग्रेस विधायक नारेबाजी करने लगे।







