भाजपा में बढ़ती गुटबाजी, अटकती नियुक्तियां
10 महीने बाद भी नहीं सुलझा विवेकानंद मंडल का विवाद, विद्यासागर मंडल में भी पुनः नियुक्ति का इंतजार

जबलपुर, यश भारत। भारतीय जनता पार्टी में नियुक्तियों को लेकर भोपाल से लेकर जिला स्तर तक और उसके बाद मंडल स्तर तक खींच तान मची हुई है। कहीं नियुक्तियां लंबे समय के बाद नहीं है तो कहीं अभी भी इंतजार है। पिछले साल दिसंबर महीने में भारतीय जनता पार्टी द्वारा जबलपुर महानगर के 18 में से 17 मंडल अध्यक्षों की सूची जारी कर दी गई थी जिसमें से स्वामी विवेकानंद मॉडल के अध्यक्ष का नाम रोक दिया गया था और अब लगभग 1 साल होने को आ रहा है लेकिन नाम पर सहमति नहीं बन पा रही है।
तीन तरफ से है खींचतान
विवेकानंद मंडल अध्यक्ष को लेकर भाजपा के तीन नेताओं के बीच तनातनी है जिसके चलते एक नाम पर सहमति नहीं बन पाई थी और मामला ठंडे बस्ते में चला गया था वैसे तो ये मंडल उत्तर मध्य विधानसभा में आता है ऐसे में यहां के क्षेत्रीय विधायक अपनी पसंद का व्यक्ति लाना चाहते हैं, तो वह दूसरी तरफइसी मंडल में जबलपुर सांसद का निवास भी है ऐसे में वे भी अपने व्यक्ति को यहां बैठना चाह रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ पड़ोस की विधानसभा से विधायक और प्रदेश सरकार में मंत्री कहीं ना कहीं अपनी पसंद का पेच भी पर्दे के पीछे से फ्साये हुए हैं, जिसके चलते एक नाम पर सहमति नहीं बनी है और अब मामला लंबित है।
विद्यासागर मंडल के भी यही हाल
एक तरफ जहां विवेकानंद मॉडल में नियुक्ति नहीं हो पाई है वहीं विवेकानंद मॉडल में तो नियुक्ति हो गई थी लेकिन विवादित वीडियो सामने आने के बाद वहां से नियुक्त की गई भाजपा नेत्री जागृति शुक्ला को हटा दिया गया था। हालांकि उनके नाम को लेकर भी भीतर खाने विरोध की बात तो थी, परन्तु नियुक्ति के बाद खुलकर कोई सामने नहीं आया था। बाद में धर्म विशेष को लेकर सामने आए वीडियो के बाद उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया और लंबा समय बीतने के बाद भी इस मंडल को अपना अध्यक्ष नहीं मिल पा रहा है.
जुआड़ी सिपाही ने लिया संरक्षक नेता का नाम तो अध्यक्ष हुए अवाक
जबलपुर, यशभारत। भाजपा अध्यक्ष द्वारा हनुमान ताल, घमापुर, ओमती क्षेत्र में अपराध और जुआ सट्टा को लेकर जब तब कड़ा रुख दिखाया जाता है। इसी मामले को लेकर कुछ लोगों द्वारा उनसे हनुमानतल थाने में पदस्थ एक सिपाही की शिकायत की गई जिस पर आरोप लगाया गया कि वह आपराधिक तत्वों को संरक्षण दे रहा है और जुआ पढ़ो से वसूली कर रहा है इसके बाद भाजपा नगर अध्यक्ष द्वारा उक्त सिपाही को फोन लगाकर जमकर हड़काया गया और सुधार जाने की नसीहत दी गई। यहां तक तो ठीक था लेकिन जब नेताजी द्वारा दबाव देकर सिपाही से संरक्षकों के नाम पूछे गए तो भावेश में आकर उक्त सिपाही द्वारा कुछ ऐसे नाम ले दिए गए जो कहीं ना कहीं सत्ता और संगठन से जुड़े हुए चेहरे थे। इसके बाद तो अध्यक्ष भी कुछ कहने की स्थिति में नहीं थे। बस समझाइस ही देते नजर आए।
हालांकि इस पूरे मामले में नगर अध्यक्ष सटोरियों के खिलाफकार्रवाई की बात तो कह रहे हैं लेकिन बातों ही बातों में किस नेता का नाम सामने आ गया इस पर कुछ कहने तैयार नहीं है। लेकिन पार्टी सूत्रों की माने तो मामले में जो नाम सामने आया है वह चौकाने वाला है जिसको सुनकर अध्यक्ष भी कुछ देर के लिए आवाक रह गए थे अब देखना होगा कि संदिग्ध सिपाही के साथ-साथ संरक्षकों पर भी कोई कार्यवाही करवाते हैं या नहीं । क्योंकि सिपाही पर कार्यवाही तो प्रशासन का विषय है लेकिन संगठन के चेहरों पर कार्रवाई तो अध्यक्ष के हाथ में ही है






