यूट्यूब पर द्वारा फैलाई जा रही खबरों को लेकर कोसमघाट के रहवासी नाराज
झूठी सिकयतो के खिलाफ ग्रामीणों ने खोला मोर्चा

जबलपुर, यश भारत। पिछले कुछ दिनों से जबलपुर जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाली पिपरिया कला ग्राम पंचायत के खिलाफ लगातार यूट्यूब चैनल प्रदेश की न्यूज़ पर समाचार प्रकाशित किया जा रहे हैं। जिसको लेकर ग्रामीणों द्वारा भी मोर्चा खोला गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जो फर्जी बिल और फर्जी निर्माण कार्य की बातें कहीं जा रहे हैं वे तथ्य हीन है और गांव में गौर नदी के तट पर जो निर्माण कार्य किया जा रहा है जैसे फर्जी बताया गया है। जब कि वास्तविकता सब के सामने है। इस तरह की बातें फैलाने वाला युटुब भी उसी गांव का है और उसे सारी वास्तविकता ज्ञात है।
जा चुका है जेल
ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि पंचायत के ऊपर आरोप लगाने वाला और सोशल मीडिया पर जेल भेजने की धमकी दे रहा यू ट्यूबर खुद अपराधिक मामले में जेल जा चुका है, उसके बाद भी ऐसा व्यक्ति समाज को नैतिकता का पाठ पढ़ा रहा है और खुद को ईमानदार बता रहा है। इस पूरे मामले में अब ग्रामीण वरिष्ठ अधिकारियों से मिलकर गांव की वास्तविकता बताने की भी बात कह रहे हैं।
गांव का गेट कर दिया गायब
ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि उनके गांव कोसमघाट में प्रवेश के लिए एक लोहे का गेट बना हुआ था जो कि उनके गांव की रास्ते की पहचान थी जिससे बाहर के लोग भटकते नहीं थे। लेकिन पिछले दिनों उक्त यूट्यूब के द्वारा गांव का गेट निकाल लिया गया और बार-बार कहने के बाद भी वापस नहीं किया जा रहा है जबकि वह शासकीय संपत्ति है जिस पर यूट्यूब पर द्वारा गायब कर दिया गया है।
यू ट्यूबर ने रखा अपना पक्ष
संबंधित व्यक्ति पत्रकार जसवंत सिंह राजपूत जो कि वर्तमान में प्रदेश की न्यूज़ जबलपुर देख रहे हैं। ने स्पष्ट किया है कि उनके खिलाफ की गई शिकायत पूरी तरह से फर्जी और निराधार है। उनका कहना है कि यह शिकायत केवल दबाव बनाने और व्यक्तिगत रंजिश के चलते दर्ज कराई गई है, जिसका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।
उन्होंने बताया कि पंचायत में लगातार उजागर हो रहे भ्रष्टाचार और गड़बड़ियों को सामने लाने के कारण सचिव और सरपंच बौखला गए हैं और उसी के परिणामस्वरूप उन्होंने उनके खिलाफ यह झूठी शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं निष्पक्ष और पारदर्शी कार्यप्रणाली में विश्वास रखते हैं और किसी भी प्रकार की जांच के लिए हमेशा तैयार हैं। साथ ही उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस तरह की झूठी शिकायतों पर ध्यान न देकर वास्तविक भ्रष्टाचार मामलों की निष्पक्ष जांच की जाए।








