
मुंबई, यश भारत
मुंबई की एक सत्र अदालत ने हत्या के एक मामले में विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) के रूप में उज्ज्वल निकम की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्यसभा सदस्य होने के बावजूद उज्ज्वल निकम का एसपीपी के तौर पर कार्य करना असंवैधानिक नहीं है।
यह याचिका हत्या के आरोपी विजय पालांडे ने दायर की थी। पालांडे ने तर्क दिया था कि उज्ज्वल निकम वर्तमान में राज्यसभा के नामित सांसद हैं, इसलिए एक साथ सांसद और विशेष लोक अभियोजक का पद संभालना कानूनी रूप से गलत है।
हालांकि, अदालत ने इस दलील को अस्वीकार करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 102(1)(a) में सांसदों की अयोग्यता से संबंधित प्रावधान हैं, लेकिन इनमें कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि कोई सांसद विशेष लोक अभियोजक के रूप में नियुक्त नहीं हो सकता। अदालत ने टिप्पणी की कि आरोपी ने कानून की गलत व्याख्या की है।
अदालत ने यह भी कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 24 के तहत राज्य सरकार को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने का अधिकार है और यह सरकार की नीति से जुड़ा निर्णय है, जिसमें बिना ठोस कानूनी आधार के न्यायालय हस्तक्षेप नहीं कर सकता।
पालांडे ने यह आशंका भी जताई थी कि उज्ज्वल निकम की राजनीतिक भूमिका से मामले पर अनुचित प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन अदालत ने इस तर्क को भी स्वीकार नहीं किया। जानकारी के अनुसार, आरोपी ने अब इसी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।






