जबलपुरमध्य प्रदेश

धान-मक्का के लिए वरदान बनी बारिश, किसानों के चेहरे खिले

पैदावार बेहतर होने की संभावना एक एकड़ में आता है 18 हजार रुपए का खर्च

जबलपुर यशभारत। लंबे इंतजार के बाद हुई झमाझम बारिश ने किसानों की चिंता को खत्म कर राहत पहुंचाई है। वहीं लोगों को गर्मी की उमस से भी राहत मिली है । खेतों में लगी धान एवं मक्का की फसल के लिए नमी का संकट झेल रहे किसान अब मौसम के बदले रुख से बेहद उत्साहित हैं। लगातार हो रही वर्षा धान और मक्का जैसी खरीफ फसलों के लिए वरदान साबित हो रही है। धान व मक्का की खेती करने वाले किसानों द्वारा फसलों में कीटनाशक एवं खाद डालने का काम जोरों पर चल रहा है।

फसलों की पैदावार बेहतर होगी

धान एवं मक्का की खेती करने वाले महेश राजपूत शिवेंद्र सिंह एवं सत्यम राजपूत ने बताया कि यदि बारिश इसी तरह समय पर होती रही तो इस बार फसलों की पैदावार अच्छी होगी। बारिश से खेतों में पानी की पर्याप्त उपलब्धता हो गई है, जिससे सिंचाई पर आने वाला अतिरिक्त खर्च भी बचेगा। वहीं मौसम विभाग ने भी अगले कुछ दिनों तक अच्छी बारिश की संभावना जताई है, जिससे खेती-किसानी के लिए माहौल अनुकूल बना रहेगा।

फसलों के लिए नमी मिलना बहुत जरूरी

किसानों ने यह भी बताया कि खेती धान और मक्का की फसल के लिए इस समय पर्याप्त नमी मिलना बेहद जरूरी था। बारिश से न केवल पौधों की बढ़वार बेहतर होगी बल्कि किसानों को खाद और दवाई का भी भरपूर फायदा मिलेगा।

खेतों में बढ़ी हलचल

गांव-गांव में किसान अपने खेतों में काम में जुट गए हैं। कई जगह धान एवं मक्का की फसलों में कीटनाशक एवं खाद डालने का कार्य पूरी रफ्तार पर है। खेतों में हलचल बढ़ने से ग्रामीण इलाकों में एक बार फिर रौनक लौट आई है। किसानों का कहना है कि अगर मौसम इसी तरह मेहरबान रहा तो इस बार भरपूर फसल होगी और मंडियों में भी चहल-पहल बढ़ेगी।कुल मिलाकर, बारिश ने किसानों की उम्मीदों को नया जीवन दे दिया है और चेहरे पर मुस्कान लौटा दी है।

कीटनाशक दवाएं हो रही बेअसर

किसानों ने बताया कि वर्तमान समय में धान एवं मक्का की फसलों में कीटनाशक दवाई का छिड़काव किया जा रहा है। किंतु दवाई बेचने वालों द्वारा किसानों से मन माफिक पैसे तो लिए जा रहे हैं किंतु दवाई सही न होने के कारण फसलों में होने वाला कचरा खत्म नहीं हो रहा है।

खाद के लिए दर-दर भटक रहे किसान

वहीं इस संबंध में किसानों ने बताया कि सोसाइटी में यूरिया एवं डीएपी खाद नहीं मिल रही है जिससे वह अपनी फसलों में समय पर खाद नहीं डाल पा रहे हैं।

बहुत मेहनत की है धान की फसल

बारिश के मौसम में लगाई जाने वाली धान की फसल में किसानों को हर जोखिम लेकर खेतों में घूमना पड़ता है तब कहीं जाकर यह फसल तैयार हो पाती है। इसके लिए किसानों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है।

एक एकड़ में लगती है 18 हजार की लागत

धान की फसल लगाने वाले किसानों ने बताया कि नर्सरी से लेकर कटाई तक प्रति एकड़ 18000 रुपए खर्च आता है जिसमें खाद बीज कीटनाशक रोटरी रोपाई एवं मजदूरों की मजदूरी भी शामिल है।

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